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उत्कृष्ट कलाकारों द्वारा नारद मोह की लीला की गई

ब्यूरो रिपोर्ट.. अनुराग तिवारी

रामलीला का मंचन करते कलाकारबांदा तिंदवारी कस्बे में दुर्गा महोत्सव के अवसर पर आयोजित होने वाले 12 दिवसीय श्री रामलीला मंचन का आयोजन उत्कृष्ट कलाकारों द्वारा नारद मोह की लीला से किया गया। जबकि पारंपरिक रूप से कार्यक्रम का शुभारंभ कमेटी पदाधिकारियों द्वारा अध्यक्ष अनिल लखेरा की अगुवाई में विधिविधान और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच गणेश पूजन के साथ किया गया। कलाकारों ने सोमवार को नारद मोह लीला का सजीव मंचन किया। जिसे देख दर्शक हर्षित हो उठे। मंचन में कलाकारों ने दिखाया कि नारद जी तपस्या करने बैठ जाते हैं। उनकी घोर तपस्या से राजा इंद्र का सिंघासन हिलने लगता है। तब उनकी चिंता सताने लगती है। इंद्रदेव नारद जी की तपस्या की भंग करने के लिए सुन्दर अप्सराओं को भेजते हैं, पर वह अप्सराएं नारद की तपस्या को भंग नही कर पाती हैं। लीला में वह कामदेव को नारद की तपस्या भंग करने के भेजते हैं, पर कामदेव भी हर प्रकार का जतन करने के बाद भी तपस्या को भंग नही कर पाते हैं। तब नारद जी को इसी बात का घमंड हो जाता है। नारद के इस घमंड को चूर करने के लिए भगवान विष्णु शीलनगरी का निर्माण करते है और उसके राजा शीलनिधि को बनाते हैं। उनकी पुत्री के विवाह का आयोजन कराते हैं। नारद जी भी वहां पहुंचते हैं। नारद भगवान विष्णु के पास पहुंच कर कहते हैं प्रभु एक दिन के लिए आप मुझे हरि का स्वरूप दे दो। भगवान विष्णु नारद के घमंड को चूर करने के लिए हरि अथार्त वानर का स्वरूप दे देते हैं। नारद जी जब उसी स्वरूप के साथ शीलनगरी पहुंचते ही तब वहां उनका उपहास उड़ाया जाता है, तब नारद जी वापस आ जाते हैं इस प्रकार भगवान विष्णु नारद जी का घमंड चूर कर देते हैं। इस अवसर पर कमेटी अध्यक्ष अनिल लखेरा, महामंत्री अरविंद कुमार गुप्ता, मुख्य सचेतक हरवंश श्रीवास्तव, उप प्रबंधक धीरज गुप्ता, कोषाध्यक्ष नमन कुमार गुप्ता, चंद्रशेखर गुप्ता किशुन, संतोष गुप्ता, डी डी गुप्ता, निखिल गुप्ता, अथर्व गुप्ता प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

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