
लोकसभा में चर्चा और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद यह स्पष्ट कर दिया गया है कि कक्षा 1 से 8 तक शिक्षक बनने या सेवा में बने रहने के लिए TET (Teacher Eligibility Test) पास करना अनिवार्य है।
सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: सितंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए सभी शिक्षकों (चाहे वे पुराने हों या नए) के लिए TET अनिवार्य है।
संसद में सरकार का रुख: फरवरी 2026 के चालू सत्र के दौरान, सांसदों द्वारा उठाए गए सवालों के जवाब में सरकार ने साफ किया है कि Right to Education (RTE) Act के तहत यह एक अनिवार्य योग्यता है और इसे सभी राज्यों में कड़ाई से लागू किया जाएगा।
इन-सर्विस (पुराने) शिक्षकों के लिए नियम:
जो शिक्षक 2011 से पहले (जब TET अनिवार्य नहीं था) नियुक्त हुए थे, उन्हें भी अब अपनी नौकरी बचाने या प्रमोशन पाने के लिए TET पास करना होगा।
ऐसे शिक्षकों को परीक्षा पास करने के लिए 2 साल का समय (2027 तक) दिया गया है।
किसे छूट मिली है?
वे शिक्षक जिनकी रिटायरमेंट में 5 साल से कम का समय बचा है, उन्हें TET पास करने की अनिवार्यता से छूट दी गई है (लेकिन वे बिना TET के प्रमोशन के पात्र नहीं होंगे)।
अल्पसंख्यक संस्थानों का मामला: अल्पसंख्यक स्कूलों (Minority Institutions) में TET की अनिवार्यता का मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट की एक बड़ी बेंच (7 जजों की बेंच) के पास विचाराधीन है।
निष्कर्ष:
अब यह पूरी तरह स्पष्ट है कि केंद्र सरकार और अदालती आदेशों के अनुसार, प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर (1-8) पर पढ़ाने के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक अनिवार्य कानून बन गई है।
रिपोर्ट – पंकज गुप्ता
जिला – जालौन, उरई
राज्य – उत्तर प्रदेश
चैनल – BB News India




