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चेन्नई। कफसिरप विवाद. पहले बच्चे की मौत की एक महीने बाद मध्यप्रदेश ने दी सूचना तमिलनाडुसरकारका दावा। रिपोर्ट राजेश कुमार यादव.।

*_कफ सिरप विवाद: पहले बच्चे की मौत के एक महीने बाद मध्य प्रदेश ने दी सूचना, तमिलनाडु सरकार का दावा_*

*चेन्नई से राजेश कुमार यादव की खास रिपोर्ट*

चेन्नई: ‘कोल्ड्रिफ’ कफ सिरप से जुड़ी बच्चों की मौतों की चल रही जांच के बीच तमिलनाडु सरकार ने सोमवार को बताया कि मध्य प्रदेश सरकार ने पहले बच्चे की मौत के लगभग एक महीने बाद अपने औषधि नियंत्रण विभाग को सूचित किया था.
कफ सिरप पीने से पहली बच्चे की मौत 4 सितंबर को मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में हुई थी. हालांकि, मध्य प्रदेश सरकार ने 1 अक्टूबर को तमिलनाडु औषधि नियंत्रण विभाग को सूचित किया. अधिकारियों ने बताया कि सूचना मिलने के 48 घंटों के भीतर तमिलनाडु सरकार ने कार्रवाई की.
तमिलनाडु स्थित श्रीसन फार्मास्युटिकल का लाइसेंस रद्द कर दिया गया है और उसकी मैन्युफैरिंग यूनिट को सील कर दिया गया है. सरकार ने एक प्रेस रिलीज जारी कर मिलावटी कफ सिरप की जांच के संबंध में उठाए गए कदम-दर-कदम कदमों का विवरण दिया है. उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश और राजस्थान में डायथिलीन ग्लाइकॉल से मिले कफ सिरप पीने से 20 से ज़्यादा बच्चों की मौत हो चुकी है.
तमिलनाडु सरकार की पहल
1 अक्टूबर: दोपहर लगभग 3 बजकर 30 मिनट पर तमिलनाडु औषधि नियंत्रण विभाग को मध्य प्रदेश राज्य औषधि नियंत्रण विभाग से एक पत्र प्राप्त हुआ. इस पत्र में कोल्ड्रिफ कफ सिरप (पैरासिटामोल, फिनाइलेफ्राइन हाइड्रोक्लोराइड, क्लोरफेनिरामाइन मैलिएट सिरप) के बारे में विस्तृत जानकारी थी, जिसके 4 सितंबर से मध्य प्रदेश में बच्चों की मौतों से जुड़े होने का संदेह है.
उसी दिन, औषधि नियंत्रण उपनिदेशक के आदेश पर एक वरिष्ठ औषधि निरीक्षक के नेतृत्व में एक टीम ने शाम लगभग 4 बजे श्रीसन फार्मा का निरीक्षण किया. इसके बाद एक अक्टूबर को ही पूरे तमिलनाडु में कोल्ड्रिफ कफ सिरप की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया.
2 अक्टूबर: फॉलो-अप निरीक्षणों के दौरान औषधि नियम 1945 के अंतर्गत उल्लंघन पाए गए और विवादास्पद गोल्डरिफ (बैच SR-13) सहित पांच दवाओं को तत्काल विश्लेषण के लिए चेन्नई स्थित सरकारी औषधि विश्लेषण प्रयोगशाला भेजा दिया गया.
विश्लेषण से पता चला कि कोल्डरिफ कफ सिरप में 48.6 प्रतिशत मात्रा में डीईजी नामक एक विषैला रसायन मिला है. इस विवादास्पद कफ सिरप का विवरण सभी औषधि निरीक्षकों को सूचित किया गया, जिसके बाद 2 अक्टूबर को ही न केवल कोल्डरिफ, बल्कि श्रीसन फार्मा की सभी दवाओं का उत्पादन बंद कर दिया गया.
ओडिशा और पुडुचेरी को गोल्डरिफ के वितरण की जानकारी मिलने पर आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित राज्यों को भी प्रासंगिक जानकारी भेजी गई.
3 अक्टूबर: श्रीसन फार्मा को जनहित में अपना प्रोडक्ट तत्काल बंद करने का आदेश जारी किया गया और कंपनी को तुरंत बंद करने का आदेश दिया गया. इसके अलावा, एक नोटिस भेजकर स्पष्टीकरण मांगा गया कि क्यों न श्रीसन फार्मा का औषधि लाइसेंस कैंसिल कर दिया जाए.
आगे की कार्रवाई के लिए विस्तृत जानकारी 3 अक्टूबर को मध्य प्रदेश औषधि नियंत्रण विभाग को ईमेल के माध्यम से भेज दी गई. उसी दिन भारतीय औषधि महानियंत्रक (DCGI) और चेन्नई साउथ के डिप्टी ड्रग कंट्रोलर को एक और रिपोर्ट और प्रोडक्शन बंद करने का आदेश भेजा गया.
7 अक्टूबर: गोल्डरिफ की जांच रिपोर्ट में 48.6 प्रतिशत डीईजी की उपस्थिति के कारण श्रीसन फार्मा के मालिक रंगनाथन के विरुद्ध कार्रवाई शुरू की गई. उनके फरार होने के कारण, औषधि निरीक्षक द्वारा कंपनी और रंगनाथन के घर के बाहर एक ज्ञापन चस्पा किया गया. इसके अलावा, औषधि नियंत्रण विभाग द्वारा रंगनाथन के विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई शुरू करने के लिए सी-2 सुंगुवरछत्रम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई गई.
9 अक्टूबर: तमिलनाडु पुलिस की मदद से, मध्य प्रदेश विशेष जांच दल (SIT) ने तड़के चेन्नई के अशोक नगर इलाके से रंगनाथन को गिरफ्तार कर लिया. जांच में आगे पता चला कि श्रीसन फार्मा में 2021 और 2022 में निरीक्षण किए गए थे, लेकिन कांचीपुरम के दो वरिष्ठ औषधि निरीक्षकों ने कथित तौर पर पिछले साल उचित निरीक्षण नहीं किया था. इन दोनों को बर्खास्त कर दिया गया है और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई चल रही है.
13 अक्टूबर: श्रीसन फार्मा का दवा निर्माण लाइसेंस पूरी तरह रद्द कर दिया गया है और कंपनी को भी बंद कर दिया गया है. अधिकारियों ने बताया कि तमिलनाडु स्थित अन्य दवा निर्माण कंपनियों का विस्तृत निरीक्षण करने के आदेश जारी किए गए हैं.

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