
सोनम का पुतला जलाना सही… पब्लिक का फुल सपोर्ट, फिर कौन दे रहा आयोजक को धमकी? जानें
रिपोर्ट राजेश कुमार यादव
लखनऊ उत्तरप्रदेश
इंदौर के चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड ने पूरे देश को हिला कर दिया था. राजा के साथ हनीमून पर गई सोनम पर पति की हत्या का आरोप है. इस मामले ने देशभर को हिला दिया था. लेकिन, अब इंदौर के ही महालक्ष्मी नगर में दशहरे के अवसर पर सोनम का शूर्पणखा के रूप में पुतला जलाने की तैयारी है.
दरअसल, पौरुष संस्था दशहरे पर शाम 4 से 6:30 बजे के बीच महालक्ष्मी नगर मेला ग्राउंड में विशाल शूर्पणखा दहन कार्यक्रम का आयोजन कर रही है. संस्था के अध्यक्ष अशोक दशोरा ने बताया, इस दौरान राजा रघुवंशी के परिवार के लोग भी शामिल होंगे. पहले महालक्ष्मी नगर मेला ग्राउंड से बॉम्बे अस्पताल चौराहे तक जुलूस निकाला जाएगा. बाद में मैदान में पुतला दहन किया जाएगा. इसमें दस और ऐसी ही महिलाओं को भी रखा गया है जिन्होंने इस तरह के अपराध किए हैं.
कई राज्यों से आ रही धमकी
संस्था के अध्यक्ष अशोक दशोरा ने बताया कि शूर्पणखा का चरित्र चालाकी और छल का प्रतीक माना जाता है. आज भी कई महिलाएं ऐसे अपराध कर रही हैं जिनसे पुरुष प्रताड़ित हो रहे हैं. इसलिए सोनम सहित अन्य दस महिलाओं के पुतले भी जलाए जाएंगे. हालांकि, इस आयोजन को लेकर विरोध भी सामने आया है. कई महिला संगठनों ने कहा कि किसी एक अपराधी महिला को लेकर पूरे महिला वर्ग को दोषी ठहराना सही नहीं है. संस्था अध्यक्ष दशोरा को हरियाणा सहित कई राज्यों से धमकी भरे कॉल भी आए हैं, लेकिन वे पुतला दहन करने पर अड़े हुए हैं.
लोगों की अलग-अलग राय
इस मुद्दे पर लोगों की राय भी बंटी हुई है. कुछ लोग मानते हैं कि सोनम ने बेहद गलत काम किया और उसका पुतला जलाना समाज को चेतावनी देता है. वहीं, कई लोग कहते हैं कि महिलाओं को सामूहिक रूप से निशाना बनाना उचित नहीं है. उनका कहना है कि वर्षों से महिलाओं पर भी अत्याचार होते आए हैं, लेकिन पुरुषों का कभी पुतला नहीं जलाया गया.
महिलाएं गलत…पर ये तरीका भी सही नहीं!
DAVV के समाजशास्त्र के शोधार्थी आशीष उपाध्याय ने कहा, सोनम का अपराध महिला छवि को धूमिल करता है. लेकिन, शूर्पणखा से तुलना और पुतला दहन पितृसत्तात्मक सोच को दर्शाता है. अपराध को केवल लिंग आधारित वर्ग में बांटना समाज की असमान मानसिकता को उजागर करता है.
समाजशास्त्र की प्राध्यापिका डॉ. नीलम हिंगोरानी ने भी इसे गलत बताया. उन्होंने कहा कि सजा कानून से मिलनी चाहिए, पुतला जलाने से समाधान नहीं होगा. हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि कुछ महिलाएं सुरक्षा संबंधी कानूनों का दुरुपयोग कर रही हैं, जिससे कई पुरुषों को प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है.
उनका मानना है कि इस तरह की घटनाओं के पीछे पारिवारिक संस्कार और सामाजिक आचरण की भूमिका भी अहम है. यदि घर में बच्चों को सही दिशा दी जाए तो इस तरह की वारदातें रोकी जा सकती हैं.





