
नशा और नशे से भरा हुआ जीवन
प्रखंड घाघरा
घागरा प्रखंड से गुमला जाने के रास्ते पर बड़काडीह अथवा आंध्र दी गांव जो पड़ता है रोड के किनारे बहुत सारे होटल और ठेले लगते हैं व काफी लोग अगल-बगल जो रोड किनारे रहते हैं वह सारे घरों में शराब बनाते हैं और प्रशासन की नजर के नीचे नाक के नीचे खुले आम बेचते हैं यह पूरा क्षेत्र शराब का अड्डा बनकर रह गया है यही तो है चमत्कार नशा का संसारl क्या यह गुमला जिले में बढ़ते वाहन दुर्घटनाओं और अन्य परेशानियों का कारण नहीं है क्या इस पर कभी किसी का ध्यान जाएगा या फिर बस ऐसे ही जीवन चलता रहेगाl मेरा सवाल यह नहीं की कैसे किसका जीवन चलता है पर मेरा सवाल यह है कि कैसे समाज चलता है कैसे समाज को दशा और दिशा मिलती है इससे हमें सरोकार रखना है अथवा नहीं क्या इस तरह की व्यवस्था को हम स्वीकार करें अथवा नहीं ज्ञात हो कि किसी भी मुख्य मार्ग पर वाहन दुर्घटना तभी होती है जब संपर्क मार्गो से कुछ लोग नशे की हालत में निकाल कर आते हैं और उसके बाद में इन घटनाओं का अंजाम होता हैं दुर्घटनाl इसके जिम्मेदार वह खुद नहीं होते क्योंकि इसके पीछे नशा होता है यहां से थोड़ी दूर आगे जाने पर खरका नाम का एक गांव है जहां रोड किनारे डेली मार्केट लगता है वहां तो खुले आम देसी शराब की बिक्री ऐसी होती है जिसे कोई उपमा अथवा अलंकार देना भी संभव नहीं हालांकि यह पूरा विषय महुआ अथवा देसी शराब से संबंधित है मैं माननीयों से विनम्र निवेदन करता हूं कि इस विषय पर कृपया अपना ध्यान केंद्रित करें एवं गुमला जिला को दुर्घटना मुक्त बनाने के लिए इस क्षेत्र में मदद करेंl क्या गुमला जिले का उत्पाद विभाग आबकारी विभाग पुलिस प्रशासन सब सो रहे हैँ क्या उनकी गाड़ियां इन रास्तों से नहीं गुजराती क्या उन्हें यह मजमा दिखाई नहीं देता या फिर वे सब जानबूझकर कुंभकरणीय निद्रा में सोए रहना चाहते हैं नशा के खिलाफ एक संघर्ष कथाl






