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राष्ट्र व समाज के नव निर्माण में आदिवासी समाज के अमर शहीदों एवं महापुरूषों का योगदान अनुपम एवं अद्वितीय – मुख्यमंत्री श्री साय

 

राष्ट्र व समाज के नव निर्माण में आदिवासी समाज के अमर शहीदों एवं महापुरूषों का योगदान अनुपम एवं अद्वितीय – मुख्यमंत्री श्री साय

                       राजा खान रिपोर्टर -देश 24 लाइव न्यूज़ जिला ब्यूरो चीफ बालोद  

राजाराव पठार ग्राम कर्रेझर में वीर मेला महोत्सव के अवसर पर आयोजित शहीद वीर नारायण सिंह के श्रद्धांजलि सभा में हुए शामिल

मुख्यमंत्री ने आदिवासी समाज की संस्कृति, इतिहास और विरासत को बताया अत्यंत वैभवशाली

मेला स्थल के समीप तालाब निर्माण हेतु 15 लाख, मेला आयोजन हेतु प्रदान की जाने वाली राशि को बढ़ा कर 20 लाख रुपए करने तथा देव स्थल में किचन शेड निर्माण करने की घोषणा

71 लाख 93 हजार के 5 विकास कार्यों का किया लोकार्पण

बालोद 10 दिसंबर 2025 । 

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राष्ट्र व समाज के नव निर्माण में आदिवासी समाज के अमर शहीदों एवं महापुरूषों का योगदान अनुपम एवं अद्वितीय योगदान है। उन्होंने कहा कि जब जब राष्ट्र व समाज पर विपत्ति आई है, आदिवासी समाज ने उनका डट कर मुकाबला कर विघटनकारी तत्वों को मुहतोड़ जवाब दिया है। मुख्यमंत्री श्री साय आज बालोद जिले के गुरूर विकासखंड के ग्राम कर्रेझर में आयोजित विराट वीर मेला महोत्सव के अवसर पर अपना उद्गार व्यक्त कर रहे थे। मुख्यमंत्री श्री साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। श्री साय एवं अतिथियों ने 3 दिवसीय विराट वीर मेला के अंतिम दिवस पर आज आयोजित शहीद वीर नारायणसिंह श्रद्धांजलि सभा में शामिल होकर अमर शहीर वीरनारायण सिंह को विनम्र श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने के पश्चात मुख्यमंत्री श्री साय ने सर्वप्रथम भगवान बूढ़ादेव, राजाराव बाबा और शहीद वीरनारायण सिंह को पूजा अर्चना कर उन्हें नमन किया।

 मुख्यमंत्री श्री साय ने आदिवासी समाज की संस्कृति, इतिहास और विरासत को अत्यंत वैभवशाली बताते हुए उसकी भूरी-भूरी सराहना की। इस अवसर पर उन्होंने ग्राम कर्रेझर में मेला स्थल के समीप तालाब निर्माण हेतु 15 लाख, मेला आयोजन हेतु आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा प्रदान कि जाने वाली 10 लाख रूपये की सहयोग राशि को बढ़ाकर 20 लाख रूपये करने तथा राजाराव पठार स्थित देवस्थल में किचन शेड निर्माण करने की घोषणा की। इसके अलावा उन्होंने मेला स्थल पर कुल 71 लाख 93 हजार रूपये के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण भी किया। इस अवसर पर श्री साय ने आदिवासी समाज के मांगों एवं समस्याओं के निराकरण हेतु समाज प्रमुखों के साथ राजधानी रायपुर में बैठकर उनका निराकरण करने की बात कही। 

कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्री अरविंद नेताम ने किया। वहीं विशिष्ट अतिथि के तौर पर आदिम जाति कल्याण मंत्री श्री रामविचार नेताम, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री श्री टंकराम वर्मा, कांकेर विधानसभा क्षेत्र के विधायक श्री आशाराम नेताम, राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष श्री रूपसाय मंडावी, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती तारिणी पुष्पेन्द्र चंद्राकर, पूर्व विधायक श्री ब्रम्हानंद नेताम, श्री प्रीतम साहू, वरिष्ट जनप्रतिनिधि श्री यशवंत जैन, श्री चेमन देशमुख, श्री राकेश यादव, वीर मेला आयोजन समिति के अध्यक्ष श्री उमेंदीराम गंगराले सहित श्री अकबर राम कोर्राम, श्री तुकाराम कोर्राम एवं अन्य समाज प्रमुखों के अलावा कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा, पुलिस अधीक्षक श्री योगेश कुमार पटेल, तथा विशाल संख्या में सामाजिक प्रतिनिधी एवं आदिवासी समाज के लोग उपस्थित थे। 

 कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि दुनिया में आदिवासी संस्कृति का एक समृद्धि इतिहास है। इस अवसर पर उन्होंने आदिवासियों के हितों के संरक्षण एवं देश-दुनिया में विशिष्ट पहचान दिलाने हेतु पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी एवं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के योगदानांे का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय वाजपेयी के द्वारा अपने कार्यकाल के दौरान आदिवासियों के विकास एवं उनके हितों के संरक्षण हेतु सर्व प्रथम जनजाति कार्य मंत्रालय की स्थापना की थी। आज जनजाति कार्य मंत्रालय का बजट हमारे राज्य के आधे बजट से भी अधिक है। श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के योगदानों के फलस्वरूप आज देश में राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च पद पर आदिवासी समाज की महिला विराजमान है। उन्होेंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में आज देश और दुनिया में आदिवासी समाज के इतिहास एवं विरासत को विशिष्ट पहचान मिला है। समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने भगवान बिरसा मुण्डा, शहीद वीर नारायण सिंह एवं श्री गैंदसिंह नायक के अद्म्य वीरता, साहस एवं राष्ट्र भक्ति का उल्लेख करते हुए उसे अतुलनीय बताया। उन्होंने कहा कि हमारे सरकार के द्वारा मोदी की गारंटी के तहत किए गए सभी वायदों को पूरा किया गया है। हमारी सरकार ने राज्य में सत्ता की बागडोर संभालने के पश्चात तत्काल 18 लाख प्रधानमंत्री आवास निर्माण की स्वीकृति एवं प्रति क्विंटल 3100 रूपये की दर से धान खरीदी, मेहनतकश तेंदुपत्ता संग्राहकों के हित में चरण पादुका योजना लागू करने के अलावा तेंदुपत्ता मानक बोरा में वृद्धि करते हुए 5500 रूपये करने का निर्णय लिया। इसके अलावा भूमिहीन किसान न्याय योजना जैसे जनहितैषी योजना शुरू करने के अलावा राज्य के शिक्षित युवाओं के हितों को ध्यान में रखते हुए पीएससी घोटाले का निष्पक्ष जाँच करने का भी निर्णय लिया है।

श्री साय ने छत्तीसगढ़ प्रदेश को अग्रणी राज्य बनाने तथा पूरी देश और दुनिया में विशिष्ट पहचान दिलाने हेतु आदिवासी समाज एवं छत्तीसगढ़ की जनता से विनम्र आशीर्वाद भी मांगा। उन्होंने कहा कि केन्द्र व राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से आज राज्य में नक्सलवाद समाप्ति की ओर है। उन्होंने कहा कि आज बस्तर सहित संपूर्ण छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद अपनी अंतिम सांसे गिन रहा है। नक्सलवाद की समाप्ति के पश्चात् बस्तर सहित समूचे छत्तीसगढ़ में हम विकास की नई गंगा बहाएंगे। उन्होंने राज्य की जनता को आश्वस्त करते हुए कहा कि हमारी सरकार राज्य के विकास के लिए कोई कसर नही छोड़ेगी। 

मुख्यमंत्री ने आदिवासी समाज के लोगों को आश्वस्त करते हुए कहा कि राजाराव पठार में आगे भी अनेक विकास कार्य किए जाएंगे। श्री साय ने किसी भी समाज एवं राष्ट्र के निर्माण के लिए शिक्षा को सबसे बड़ा अस्त्र बताते हुए आदिवासी समाज को आने वाले पीढ़ी को शिक्षित एवं ज्ञानवान बनाने की दिशा में कार्य करने को कहा। मुख्यमंत्री ने केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा आदिवासी समाज के कल्याण हेतु संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं के संबंध में भी विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना के अंतर्गत कुल 80 हजार करोड़ रूपये की राशि का प्रावधान किया गया है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने समाज प्रमुखों के मांग पर राजधानी रायपुर में समाज प्रमुखों के साथ बैठक आयोजित आदिवासी समाज के मांगों एवं समस्याओं की निराकरण की दिशा में आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने की भी बात कही। मुख्यमंत्री श्री साय ने राजाराव पठार में विशाल एवं भव्य वीर मेला महोत्सव के आयोजन की भूरी-भूरी सराहना की। 

 कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्री अरविंद नेताम ने राज्य के विकास में सबसे बड़ी बाधक नक्सलवाद का लगभग समाप्तप्राय होने पर राज्य व केन्द्र सरकार के प्रयासों की भूरी-भूरी सराहना की। उन्होंने कहा कि आज से कुछ वर्षों तक नक्सलवाद की समाप्ति असंभव एवं दुष्कर लगता था। लेकिन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित 

शाह एवं छत्तीसगढ़ सरकार के ठोस एवं कारगर प्रयासों के फलस्वरूप पूरे देश के साथ-साथ छत्तीसगढ़ में भी समाप्ति की ओर है। इस अवसर पर उन्होंने राजाराव पठार में विराट वीर मेला महोत्सव के आयोजन के महत्व एवं उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए समाज के मांगों एवं समस्याओं की ओर मुख्यमंत्री श्री साय एवं छत्तीसगढ़ सरकार का ध्यान भी आकृष्ट कराया। 

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आदिम जाति कल्याण एवं कृषि मंत्री श्री राम विचार नेताम ने कहा कि आज आप सभी के बीच आकर मुझे अत्यंत खुशी हो रही है। मैं आपको विश्वास दिलाना चाहता हूँ कि सरकार और आपके मुख्यमंत्री पूरी तरह से आपके साथ खड़े हैं, किसी भी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। हमारा संकल्प स्पष्ट है, प्रदेश के हर वर्ग का समग्र विकास। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा विकास के कई नए कार्य तेजी से आगे बढ़ाए जा रहे हैं। राजधानी रायपुर में नव निर्मित नया म्यूजियम हमारी संस्कृति को संरक्षित करने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी प्रदान करेगा। 

वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि जिन मुद्दों के लिए हमारे पूर्वजों ने संघर्ष किया, वे आज साकार हो रहे हैं। वन अधिकार की लंबी लड़ाई का परिणाम है कि आज उनके परिजनों को उनका अधिकार मिल रहा है। शहीद वीर नारायण सिंह ने देश और संस्कृति के लिए अपना सर्वस्व समर्पित किया। मुख्यमंत्री श्री साय के नेतृत्व में प्रदेश खुशहाली की ओर बढ़ रहा है और बस्तर वर्षों पुरानी नक्सली पीड़ा से मुक्त हो रहा है। यहां के लोगों के जीवन में खुशहाली आ रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, निर्माण और विकास की मजबूत नींव बस्तर में रखी जा रही है। मुख्यमंत्री द्वारा रोडमैप तैयार कर लगातार बस्तर के विकास में जुटे हैं। श्री कश्यप ने धर्मांतरण को रोकने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि आदिवासी संस्कृति की रक्षा हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि बस्तर में तीन मेडिकल कॉलेज और एक विश्वविद्यालय स्थापित हुए हैं। दिल्ली में आदिवासी बच्चों के लिए बने छात्रावास से उन्हें डॉक्टर और इंजीनियर बनने में बड़ी सहायता मिल रही है।

समारोह में स्वागत भाषण प्रस्तुत करते हुए वीर मेला आयोजन समिति के अध्यक्ष श्री यूआर गंगराले ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं अतिथियों के समक्ष समाज के प्रमुख मांगों को प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का आभार प्रदर्शन पूर्व विधायक श्री ब्रम्हानंद नेताम ने किया। इस अवसर पर आदिवासी समाज के लोक कलाकारों के द्वारा रेला, मांदरी, हुलकी आदि परंपरागत लोक विधाओं एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों की जीवंत प्रस्तुति भी दी गई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने आदिवासी समाज के रचनाकार श्रीमती हेमवती ठाकुर के द्वारा रचित पुस्तक ’आदिशक्ति माँ अंगारमोती’ एवं श्री मरई राधेश्याम बस्तरिया की पुस्तक ’घोटुल पुंदाना’ पुस्तक का भी विमोचन किया। 

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