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किसानों की समस्याओं को लेकर छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा और संयुक्त किसान मोर्चा ने राष्ट्रपति के नाम पर सौंपा ज्ञापन

छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा और संयुक्त किसान मोर्चा ने डौंडीलोहारा अनुविभागीय अधिकारी / जिले के कलेक्टर को राष्ट्रपति के नाम पर ज्ञापन सौपा जिसमें देशव्यापी किसान आन्दोलन के पांच साल पूरा होने के अवसर पर संयुक्त किसान मोर्चा दिल्ली के देशव्यापी आ‌ह्वान पर संयुक्त किसान मोर्चा छत्तीसगढ़ द्वारा जिला कलेक्टरों के माध्यम से आपको ज्ञापन प्रेषित कर किसानों, मजदूरों सहित आम मेहनतकश वर्ग की विभिन्न समस्याओं एवं राज्य सरकार की नीतियों के संबंध में निम्नलिखित मांगों को रख रहें |

 

मोहम्मद इमरान राजा खान - रिपोर्टर जिला ब्यूरो बालोद

मोहम्मद इमरान राजा खान – रिपोर्टर जिला ब्यूरो बालोद 

सी 2+50 प्रतिशत फार्मूला के आधार पर सभी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी लागू किया जाए और उस पर खरीद सुनिश्चित की जाए। भाजपा के घोषणा पत्र के आधार पर देश के सभी राज्यों में धान की कीमत 3100 रु. प्रति क्विटल और दो साल साल के बढ़े हुए एमएसपी जोड़कर 3286 रुपये प्रति क्विटल की दर से खरीदी किया जाए।छत्तीसगढ़ में एग्रीस्टेक पोर्टल में पंजीयन से वंचित किसानों का पूर्व वर्ष की पंजीयन वो आधार पर फसल की खरीदी किया जाये तथा पंजीयन की प्रक्रिया धान खरीदी तक जारी रखा जाए साथ ही राजीव गांधी किसान न्याय योजना का बकाया एक किस्त किसानों को भुगतान किया जाए।बिजली क्षेत्र का निजीकरण रदद कर स्मार्ट मीटर को बाहर किया जाये। ग्रामीण इलाकों को प्रति दिन 24 घंटे बिजली उपलब्ध हो. जिसमें सिंचाई के लिए पंप सेट शामिल हों। बढ़ी हुई बिजली दर वापस लिया जाए।कॉरपोरेट हीत में किये जा रहे जल, जंगल, जमीन और पर्यावरणीय क्षति को रोका जाए।

वर्तमान खरीफ सीजन में कीट प्रकोप एवं बेमौसम बारिश से फसलों को हुए नुकसान का मूल्यांकन प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत् किसान के खेत को इकाई मानकर किया जाये क्योंकि बीमा की राशि किसानों के खेत की रकबा के अनुसार ली जाती है परंतु नुकसान का मूल्यांकन ग्राम में हुए नुकसान की प्रतिशत के आधार पर किया जाता है जो कि दोषपूर्ण मूल्यांकन है। इसलिए ग्राम को इकाई न मानकर प्रभावित किसान के खेत को इकाई माना जाये तथा फसल क्षतिपूर्ति प्रदान किया जाये।बिना किसान किताब के तुरंत रजिस्ट्री एवं नामांतरण करने संबंधी आदेश को प्रभाव से रद्द किया जाये क्योंकि इससे भू-माफिया सक्रीय होंगे और किसानों के साथ धोखाधडी बढ़ेगी। कम पढ़े लिखे और ग्रामीण किसान अपने जमीन से वंचित हो जायेंगे।पांचवी व छठी अनुचूचि क्षेत्रों में पेसा कानून का पालन किया जाये। वन क्षेत्र में रह रहे आदिवासी एवं गैर आदिवायििों को वन अधिकार पट्टा प्रदान किया जाये।

सभी सार्वजनिक संस्थाओं में कार्यरत अनियमित, अंशकालिक एवं संविदा कर्मचारियों को स्थायी व नियमित किया जाकर प्लेसमेंट एजेंसी बंद किया जाए। पूर्व में लागू श्रम कानूनों का पालन किया जाए नयी श्रम संहिता रद्द किया जाए।किसानों को पर्याप्त यूरिया, डीएपी, सुपर फॉस्फेट, जिंक और पोटाश उपलब्ध कराया तथा उर्वरकों की कालाबाजारी पर रोक लगायी जाए।राजस्व एवं कृषि भूमि क्षेत्र में विचरण करने वाले जंगली सुअर को वन्यप्राणी अधिनियम से पृथक किया जाये।

छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष श्री जनक लाल ठाकुर ने अनुविभागीय दंडाधिकारी के समक्ष किसानों की समस्याओं को रखा और वर्तमान में धान खरीदी में आ समस्याओं को तत्काल प्रभाव से निराकरण करने को कहा उन्होंने बताया की धान मंडी में किसानों को स्टाॅक लगाने को कहा जाता है जबकि ये उनका काम नहीं है, मंडी में प्रर्याप्त मात्र कर्मचारियों की कमी है, जिला किसान संघ के अध्यक्ष गैद सिंह ठाकुर ने कहा किसानों की बेमौसम बारिश से फसल का काफी नुकसान हो गया जिस पर सरकार अभी तक को नीति नहीं बना पाया, सरकार द्वारा निर्धारित 21 क्विंटल मानक प्रति एकड़ के हिसाब से धान खरीदी किया जाना हैं, अगर कोई किसान 21 क्विंटल धान नहीं बेच पता मतलब उस किसान उतना नुकसान हुआ है जितना 21क्विंटल में बच जाता है मतलब सीधा उस किसान का उतना फसल नुकसान हुआ सरकार को उस किसान को उतने फसल का मुआवजा देना होगा।

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