
बसपा के समर्थकों ने लखनऊ पहुंच कर मायावती को निराश नहीं किया।
लखनऊ से राजेश कुमार यादव की रिपोर्ट
लखनऊ उत्तरप्रदेश
यूपी में बीजेपी की सरकार है। वह भी इतनी भीड़ जमा नहीं कर सकती है लेकिन क्या मायावती बीजेपी को लेकर चुप रहीं? लखनऊ आई भीड़ मौजूदा योगी सरकार के ख़िलाफ़ जो सुनना चाहती होगी क्या उसे सुनने को मिला? इसे लेकर विपक्ष ने मायावती को फिर से बीजेपी की बी टीम बताना शुरू कर दिया। चीफ जस्टिस पर जूता फेंकने की घटना हुई है, हरियाणा के सीनियर दलित IPS अफसर ने अपनी ज़िंदगी ख़त्म कर ली। अपने नोट में उन्होंने जातिगत प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं। रायबरेली में दलित युवक की हत्या हुई है। इन सब घटनाओं पर भी मायावती आज गरज सकती थीं। उन्होंने भाजपा सरकार की नीतियों की आलोचना की मगर आलोचना के तेवर समीक्षा के थे। लेकिन क्या उनकी रैली को प्रायोजित बताना और विपक्ष की नज़र से ही देखना होगा? बसपा का वोटर आखिर उनके साथ क्यों बना हुआ है, इसे भी तो देखना होगा। नहीं तो लखनऊ में आई भीड़ चर्चा का कारण क्यों
बनती?


