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तारीघाट स्टेशन पर यात्रियों की सुरक्षा पर नहीं कोई ध्यान

पूर्व मध्य रेलवे के दानापुर मंडल अंतर्गत नवनिर्मित तारीघाट रेलवे स्टेशन पर करीब 50 लाख रुपये की लागत से प्रस्तावित जीआरपी पुलिस चौकी की स्थापना ढाई वर्ष बाद भी शासन स्तर पर लंबित है, जिससे यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है।

जीआरपी अधिकारियों ने जुलाई 2023 में शासन और एडीजी रेलवे को विस्तृत प्रस्ताव भेजा था। प्रस्ताव में आवासीय भवन, कार्यालय, बंदीगृह, शौचालय, पेयजल सुविधा, वाहन व्यवस्था सहित अन्य आवश्यक संसाधनों का प्रावधान किया गया है। साथ ही 24 घंटे सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक उपनिरीक्षक, एक दीवान और लगभग आधा दर्जन आरक्षियों की तैनाती का प्रस्ताव है।

हालांकि अब तक इस पर मंजूरी नहीं मिल सकी है। स्थायी सुरक्षा व्यवस्था के अभाव में पिछले दो वर्षों में दर्जनों चोरी की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। लाखों रुपये मूल्य के लोहे के सामान की चोरी हुई है। कुछ मामलों में सामान बरामद भी हुआ, लेकिन घटनाओं पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग सका।

सुरक्षा कर्मियों की कमी का असर प्लेटफॉर्म व्यवस्था पर भी दिख रहा है। कई बार लोग प्लेटफॉर्म पर साइकिल और दोपहिया वाहन दौड़ाते नजर आते हैं, जिससे बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है।

तारीघाट रेलवे स्टेशन की आधारशिला 14 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लगभग 25 करोड़ रुपये की लागत से रखी गई थी। करीब आठ वर्षों के निर्माण के बाद जनवरी 2024 में स्टेशन बनकर तैयार हुआ और मार्च 2024 में इसका उद्घाटन किया गया। वर्तमान में यहां से दो पैसेंजर ट्रेनों का संचालन हो रहा है, जिनसे प्रतिदिन सैकड़ों यात्री आवागमन करते हैं।

जीआरपी प्रभारी अश्वनी कुमार पटेल ने बताया कि चौकी स्थापना का प्रस्ताव मंजूरी के लिए लंबित है। उच्चाधिकारियों से वार्ता जारी है और स्वीकृति मिलते ही चौकी स्थापित कर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाएगी।

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