
रेवतीपुर (गाजीपुर) ब्लॉक में पशुओं को एफ एम डी से बचाने के लिए टीकाकरण अभियान में तेजी नहीं पकड़ पा रहा है।
तमाम प्रयासों के बावजूद अभियान की रफ्तार बेहद धीमी बनी हुई है, जिससे शासन की महत्वाकांक्षी पशु-रोग नियंत्रण योजना पूरी तरह साकार होती नजर नहीं आ रही है।
रेवतीपुर ब्लॉक की 46 ग्राम पंचायतों में मवेशियों के टीकाकरण हेतु शासन द्वारा 24 हजार वैक्सीन डोज उपलब्ध कराई गई हैं। यह अभियान 25 जनवरी को शुरू हुआ था, जिसका उद्देश्य 28 फरवरी तक शत-प्रतिशत पशुओं का टीकाकरण सुनिश्चित करना है।
परंतु पशुपालन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, अभियान शुरू होने के बाद से अब तक मात्र 6 हजार पशुओं का ही एफएमडी टीकाकरण हो सका है। ऐसे में, शेष बचे 18 हजार पशुओं का टीकाकरण निर्धारित 22 दिनों की समय-सीमा में पूरा हो पाएगा या नहीं, इस पर गंभीर संदेह बना हुआ है l
पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस महत्वपूर्ण अभियान के लिए कुल तीन टीमें गठित की गई हैं, जिनमें 12 पैरावेट तैनात हैं। प्रत्येक टीम को तीन से चार गांवों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
अधिकारियों के अनुसार, एफएमडी एक अत्यंत संक्रामक रोग है, जो तेजी से पशुओं में फैलता है। इस बीमारी के प्रमुख लक्षणों में मुंह से लार का रस्सी की तरह टपकना, मुंह से आवाज आना, मसूड़ों और जीभ पर छाले, खुरों के बीच छाले व घाव, तेज बुखार, सुस्ती, दूध उत्पादन में भारी गिरावट, आंखों से पानी आना और थनों पर छाले शामिल हैं। इन लक्षणों के कारण पशुओं को असहनीय दर्द होता है और वे लंगड़ाकर चलने लगते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, एफएमडी से बचाव के लिए हर छह महीने में नियमित टीकाकरण सबसे प्रभावी उपाय है। इसके साथ ही, बीमार पशुओं को अलग रखना, पशु बाड़ों की नियमित सफाई, चारा-पानी के साझा स्रोतों से परहेज और बाहरी व्यक्तियों व वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाना भी आवश्यक है। किसी भी लक्षण पर तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. गौरव द्विवेदी ने बताया कि टीकाकरण अभियान लगातार जारी है। उन्होंने कहा कि अभियान में लगे कर्मचारियों को तेजी लाने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं और निर्धारित समय सीमा के भीतर शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित



