
वाराणसी में आवारा कुत्तों का आतंक: झुंड बनाकर कर रहे हैं हमले, नगर निगम बना मूकदर्शक
वाराणसी से राजेश कुमार यादव की खास रिपोर्ट
वाराणसी: धार्मिक नगरी वाराणसी इन दिनों आवारा कुत्तों के आतंक से परेशान है। शहर के विभिन्न इलाकों में ये कुत्ते झुंड बनाकर राह चलते लोगों पर हमला कर रहे हैं। विशेषकर सुबह और देर रात के समय सड़कों पर चलना आम नागरिकों के लिए मुश्किल हो गया है।
बीते कुछ दिनों में कई इलाकों से कुत्तों के काटने की घटनाएं सामने आई हैं। खासकर लंका, भेलूपुर, सिगरा, कबीरनगर और अस्सी क्षेत्रों में इनकी सक्रियता ज्यादा देखी जा रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि ये कुत्ते झुंड में इकट्ठा होकर बच्चों, बुजुर्गों और दोपहिया वाहन चालकों को निशाना बना रहे हैं।
एक निवासी ने बताया, “रोज़ सुबह स्कूल जाते समय बच्चे डर के मारे बाहर निकलने से कतरा रहे हैं। कई बार तो ये कुत्ते अचानक हमला कर देते हैं, जिससे दुर्घटनाएं भी हो रही हैं।”
नगर निगम की भूमिका इस पूरे मामले में बेहद लचर नजर आ रही है। कई बार शिकायत किए जाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। ना तो कुत्तों को पकड़ने के लिए कोई अभियान चलाया गया, और ना ही कोई जागरूकता कार्यक्रम शुरू किया गया है।
स्थानीय पार्षदों और सामाजिक संगठनों ने नगर निगम से मांग की है कि जल्द से जल्द आवारा कुत्तों की समस्या का समाधान निकाला जाए। उन्होंने सुझाव दिया है कि कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण की योजनाएं तेज की जाएं, साथ ही शहर में पर्याप्त संख्या में डॉग कैचर्स तैनात किए जाएं।
वाराणसी जैसे बड़े और धार्मिक शहर में इस तरह की समस्या का बढ़ना न सिर्फ जनसुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि प्रशासन की लापरवाही को भी उजागर करता है। यदि समय रहते नगर निगम ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो यह संकट और गंभीर हो सकता है।
वाराणसी में आवारा कुत्तों का जहां आतंक: बना हुआ है वही वे झुंड बनाकर कर रहे हैं हमले, नगर निगम भी मूकदर्शक बना हुआ है इनको कोई चिंता नहीं हैं जबकी
वाराणसी एक धार्मिक नगरी वाराणसी इन दिनों आवारा कुत्तों के आतंक से परेशान है। शहर के विभिन्न इलाकों में ये कुत्ते झुंड बनाकर राह चलते लोगों पर हमला कर रहे हैं। विशेषकर सुबह और देर रात के समय सड़कों पर चलना आम नागरिकों के लिए मुश्किल हो गया है।
बीते कुछ दिनों में कई इलाकों से कुत्तों के काटने की घटनाएं सामने आई हैं। खासकर लंका, भेलूपुर, सिगरा, कबीरनगर और अस्सी क्षेत्रों में इनकी सक्रियता ज्यादा देखी जा रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि ये कुत्ते झुंड में इकट्ठा होकर बच्चों, बुजुर्गों और दोपहिया वाहन चालकों को निशाना बना रहे हैं।
एक निवासी ने बताया, “रोज़ सुबह स्कूल जाते समय बच्चे डर के मारे बाहर निकलने से कतरा रहे हैं। कई बार तो ये कुत्ते अचानक हमला कर देते हैं, जिससे दुर्घटनाएं भी हो रही हैं।”
नगर निगम की भूमिका इस पूरे मामले में बेहद लचर नजर आ रही है। कई बार शिकायत किए जाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। ना तो कुत्तों को पकड़ने के लिए कोई अभियान चलाया गया, और ना ही कोई जागरूकता कार्यक्रम शुरू किया गया है।
स्थानीय पार्षदों और सामाजिक संगठनों ने नगर निगम से मांग की है कि जल्द से जल्द आवारा कुत्तों की समस्या का समाधान निकाला जाए। उन्होंने सुझाव दिया है कि कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण की योजनाएं तेज की जाएं, साथ ही शहर में पर्याप्त संख्या में डॉग कैचर्स तैनात किए जाएं।
निष्कर्ष:
वाराणसी जैसे बड़े और धार्मिक शहर में इस तरह की समस्या का बढ़ना न सिर्फ जनसुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि प्रशासन की लापरवाही को भी उजागर करता है। यदि समय रहते नगर निगम ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो यह संकट और गंभीर हो सकता है।







