स्वछता अभियान बेअसर कचरा प्रबंधन को लेकर पंचायत लापरवाह
स्वच्छता अभियान बेअसर कचरा प्रबंधन को लेकर पंचायत नहीं कर रही ठोस पहल गांवों में कचरे के ढेर, बाहर रखे कचरा घर बने शोपीस, जिम्मेदार नहीं देते ध्यान संवाददाता गोविन्द दुबे रायसेन बरेली/कागजों में स्वच्छता अभियान तो चलाया जा रहा है, इसकी रिपोर्ट भी पंचायतों से लेकर बरिष्ठ कार्यालयों के जरिए सरकार तक पहुंच रही हैं, लेकिन धरातल पर हालत बद से बदतर बने हुए हैं। पंचायतों में न तो ग्रामीण जागरुकता का परिचय दे रहे हैं न ही पंचायतों के जिम्मेदार इसके लिए पहल कर रहे हैं, परिणाम स्वरुप स्वच्छता अभियान को पलीता लगाया जा रहा है। हालत यह है कि गांवों में अब भी जगह जगह कचरे के ढेर लग रहे हैं। पंचायत द्वारा बनाए गए कचरा घर शोपीस बने हुए हैं। ऐसे स्वच्छता अभियान को लेकर सरकार की मंशा पूरी नहीं हो पा रही है। उल्लेखनीय है कि बाड़ी जनपद अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत में स्वच्छ भारत अभियान अंतर्गत कूड़ेदान बनाए गए थे। लेकिन यह कूड़ेदान लोगों के उपयोग में नहीं आ रहे हैं, जिससे गांव की मुख्य सड़कों के किनारे कचरे के ढेर लगे हुए है। जबकि पंचायत के द्वारा कचरा प्रबंधन के लिए कई पंचायत में (नाडेफ) कूड़ेदान का निर्माण कार्य कराया गया है। लेकिन यह सब अनुपयोगी पड़े हुए हैं। ग्रामीणों की सोच में बदलाव जरूरी, जागरूकता को लेकर करना होगी पहल सीईओ से जानकारी लेकर करेंगे कार्रवाई • पंचायत में स्वच्छता अभियान को लेकर सरपंच सचिव सहित जनपद स्वच्छता प्रभारी के द्वारा लापरवाही बरती जा रही है तो हम इस संबंध में संबधित पर कार्रवाई करेंगे। साथ ही कचरा घर और नाडेफ की वर्तमान में क्या स्थिति है इसकी जानकारी सीईओ से मंगवाता हूं। अन उपयोगी पड़े कचरा बॉक्स इन पंचायतों में योजनाओं की स्थिति ग्राम पंचयत खेरी मुगली, कामतोन, चारगांव, पाली, किनगी, अलीगंज, सहित 50 से अधिक पंचायत की स्थिति खराब है। वर्ष 2022-23 में स्वच्छ भारत मिशन अंतर्गत प्रत्येक ग्राम पंचायतों में बनाए गए कूड़ेदान या तो क्षतिग्रस्त हो चुके हैं और यदि इनमें जो शुरुआत में कचरा जल गया था वह सालों गुजरने के बाद भी साफ नहीं हो सका। ऐसी स्थिति में आने वाले बारिश के मौसम में कचरे के ढेर और सफाई नहीं होने की स्थिति में गांवों में संक्रमित बीमारी फैलने का डर बना हुआ है। साथ ही सड़कों और नालियों की पंचायत ने महीनों से सफाई नहीं करवाई गई। वहीं नालियां चोक होने से सड़कों के ऊपर गंदा पानी बहता है और कई जगह गंदे पानी का भराव होने से गांव के लोगों का आवागमन प्रभावित होता है और गांव के छोटे बच्चे संक्रमित बीमारियों का शिकार होते है। लेकिन इस समस्या का निराकरण करने के लिए पंचायत के सरपंच-सचिव ध्यान नहीं देते। ये हैं जिम्मेदार संतोष मुदगल, एसडीएम 11 जून को दिया है नोटिस पंचायत में निर्माण कार्य में जिस तरह सरपंच सचिव और जनपद के अधिकारी रुचि दिखाते हैं। लेकिन वहीं दूसरी ओर पंचायत में साफ सफाई को लेकर सरपंच, सचिव और अधिकारी गंभीर नहीं है। जबकि पंचायत सफाई व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी सरपंच और सचिव की रहती है। लेकिन सफाई व्यवस्था के नाम पर सिर्फ बिल लगाने तक ही पंचायत के सरपंच और सचिव शामिल रहते हैं। इसके बाद सफाई कार्य पर उनके द्वारा बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया जाता। वहीं जनपद अधिकारी स्वच्छता के नाम पर होने वाले निर्माण कार्यों का बिना जांच किए ही पूरा भुगतान कर देते हैं। • आपके द्वारा पूर्व में भी सूचना दी गई थी, जानकारी लेने पर पता चला है कि कचरा बॉक्स पूर्व की भांति पंचायत में सिर्फ रखे हुए हैं इनका उपयोग नहीं किया जा रहा। इस संबंध में 11 जून को सरपंच, सचिव और स्वच्छता प्रभारी को निर्देशित किया गया है कि पंचायत में स्वच्छता का ध्यान रखा जाए और स्वच्छता बॉक्सो का उपयोग प्रारंभ किया जाए। -दानिश अहमद, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत बाड़ी
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*उठो..लाल.. आब..आँखे..खोलो..अगर सरकारी विभागों के खिलाफ खबर हजम नही हो तो मीडिया को खण्डन छापने का बोलो।* *रतलाम ब्यूरो रिपोर्ट इमरान खान* रतलाम समाज की आँखे माने जाने वाला मीडिया अब जिम्मेदारों की आँखों की किरकिरी बनते जा रहे है। घोटाले, घपले, लापरवाहियां, खामियां,लेटलतीफी,मनमानी, रिश्वतखौरी आदि हर तरफ पसरी हुई है, मगर जिम्मेदार इन सभी बुराईयों को मौन स्वीकृति देकर या इन्हे अनदेखा कर इनके कारनामों की परते खोलने वालों पर लगाम कसने की तैयारी कर रहे है। बीते दिनों एक फतवा जारी हुआ है, जिसमें उल्लेख किया गया है कि प्रत्येक विभाग प्रमुख हर दिन सुबह अखबार पढ़ेगा, पोर्टल आदि खोलेगा और अपने या अपने विभाग से संबधित खबर को पढ़ेगा,देखेगा । अगर खबर सही है तो खबर में बताई गई बुराईयों को दूर करने का त्वरित प्रयास करेगा और अगर खबर विभाग प्रमुख को हजम नही होती है, तो इनकी जिम्मेदारी रहेगी कि वह खबर का खण्डन हर हाल में मीडिया वाले के माध्यम से उसी दिन कराए। अरे….खंडनबाजों…. अगर विभाग प्रमुख और अमला….इतना सजग और सेवाभावी होता तो जनसुनवाई जैसे कार्यक्रमों में 100-100 शिकायती आवेदन हर मंगलवार को नही पहुचते। जनता अपनी परेशानियों से लोहा लेते लेते आंदोलन और चक्काजाम आदि करने को मजबूर नही होती। लोग सूचना का अधिकार की तहत जानकारी लेने के लिए सालों से भटक रहे है और जिला पंचायत जैसे विभाग के अफसर उन्हे कार्यालय बुलाकर निपटाने की तैयारियों को अंजाम देने में लगे है। खंडन परम्परा को हवा देकर इसे स्थापित करने के अखबारों को अधकचरे और समय बैसमय समाचार देने वाले एक विभाग को भी पांबद किया गया है। इस विभाग के जिम्मेदार भी अखबार की कतरन संबधित विभाग के प्रमुख को भेज कर समाचारों में खंडन की संभावना खोजने का प्रयास करेगे। इधर मीडिया भी इतना फ्री नही बैठा है कि कुछ भी छापता छूपता रहे। अखबारों का तो 1 कालम 10 सेंटीमीटर हिस्सा ही लगभग 1 से 3 हजार तक बैठ रहा है। इस हिसाब से अगर सरकारी समाचार को छापकर विभागों को भुगतान के बिल भेजे जाएंगे? तो खर्च का हिसाब हर माह लाखों में बैठेगा। अब इधर अगर कोई जनता की आवाज, परेशानी, उसका शिकायती पत्र आदि मीडिया के माध्यम से उजागर करता है तो उसमें सुधार के प्रयास किए जाना चाहिए। इस तरह के फरमान से उन विभाग वालों की बल्ले बल्ले हो गई है, जो नामचीन और आदतन लापरवाह भ्रष्ट आचरण आदि की लिस्ट में शामिल है। राजस्व, नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, लोक निर्माण, जल निगम, सडक़ परिवहन आदि विभागों के कारनामों और कार्यप्रणाली को को बीते दिनों दिशा समिति की बैठक में सांसद,विधायकों सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने उजागर बता दिया है कि जिले का विकास किस… अगति की और अग्रसर होता जा रहा है। कई विभागों की फाईले विगत माह से इधर से उधर गोते खा रही है, पहले नीचे वाले अफसर से अवलोकन कराओं और उसके बाद बड़े साहब की स्वीकृति लेने आओं। बहरहाल, अब समय आ गया है कि फरमान जारी करने वालों के दरबार में भांड मिरासियों की तरह इनका गुणगान करो। अगर इनके गायन के अनुसार सुर नही लगाया तो फजीहत हो सकती है। फिलहाल इस फरमान का पालन कौन-कौन, कब-कब करता है, ये आने वाले समय में पता चलेगा, फिलहाल… विभाग प्रमुख अपने विभागों की खबरे पढक़र खंडन-फंडन तैयार करने की तैयारियों का मसौदा तैयार कर रहे है या करवा रहे है।
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