सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बरुइन बना ‘सफेद हाथी’: लाखों के बजट और 50 कर्मियों की तैनाती के बावजूद स्वास्थ्य सेवाएं रामभरोसे

जमानिया (गाजीपुर) शासन की ओर से ग्रामीण अंचलों के लोगों को उनके घर के नजदीक ही बेहतर, सुलभ और उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए भले ही करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए जा रहे हों, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही और जिम्मेदारों की उदासीनता इन योजनाओं पर भारी पड़ रही है। जमानिया विकास खंड के अंतर्गत आने वाला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) बरुइन इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। लाखों-करोड़ों की लागत से खड़ा किया गया यह अस्पताल आज क्षेत्र के लोगों के लिए केवल एक 'सफेद हाथी' साबित हो रहा है।
30 बेड की आधुनिक क्षमता और लगभग 50 स्वास्थ्य कर्मियों की भारी-भरकम फौज तैनात होने के बावजूद यह अस्पताल पूरी तरह 'रामभरोसे' संचालित हो रहा है। जमीनी हकीकत यह है कि अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को इलाज के नाम पर सिर्फ निराशा हाथ लग रही है।
गुरुवार को खुली पोल: एक डॉक्टर और पांच कर्मी मिले मौजूद
गुरुवार को जब इस स्वास्थ्य केंद्र की जमीनी हकीकत टटोली गई, तो व्यवस्थाओं की पोल खुल गई। 50 से अधिक की तैनाती के सापेक्ष सीएचसी पर मात्र एक डॉक्टर और पांच स्वास्थ्य कर्मी ही मौजूद मिले। हैरानी की बात तो यह है कि अस्पताल में तैनात दंत चिकित्सक (डेटा ऑपरेटर/डेंटल सर्जन) द्वारा जनरल मेडिसिन के मरीजों को देखा जा रहा है और सामान्य बीमारियों की दवाइयां लिखी जा रही हैं।
बता दें कि कुछ दिन पूर्व ही अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (ACMO) द्वारा इस अस्पताल का औचक निरीक्षण किया गया था, जिसमें बड़े पैमाने पर अनियमितताएं मिलने पर करीब एक दर्जन से अधिक स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई थी। इसके बावजूद व्यवस्थाओं में सुधार होने का नाम नहीं ले रहा है।
तीन दर्जन से अधिक गांवों के ग्रामीण हैं इस पर निर्भर
इस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर बरुइन के अलावा कस्बा बाजार, हेतिमपुर, हमीदपुर, बडेसर, गायघाट, रायपुर, अभईपुर, मदनपुरा, जमानिया स्टेशन बाजार, तलाशपुर, नई बाजार, कंदवा, असना, जलालपुर, डेढगांवा, महली समेत तीन दर्जन से अधिक गांवों की ग्रामीण आबादी अपनी छोटी-बड़ी स्वास्थ्य जरूरतों के लिए निर्भर है।
स्थानीय ग्रामीण अभिषेक सिंह, गोपाल, अमरनाथ, गणेश गुप्ता, शंभु बनवासी, रोशन राजभर आदि का कहना है कि कहने को तो अस्पताल में 8 डॉक्टरों समेत 50 स्वास्थ्य कर्मियों का स्टाफ कागजों पर दर्ज है, लेकिन धरातल पर मरीजों की सुध लेने वाला कोई नहीं होता। डॉक्टरों की लगातार गैर-मौजूदगी ग्रामीणों की उम्मीदों पर पानी फेर रही है। आला अधिकारियों की अनदेखी के चलते यह अस्पताल धीरे-धीरे बदहाली के आगोश में समाता जा रहा है और इसकी इमारतें खंडहर में तब्दील होती जा रही हैं।
ग्रामीणों और तीमारदारों का आरोप है कि इस अस्पताल में कागजों और धरातल पर कई आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। यहां ऑक्सीजन प्लांट, पैथोलॉजी जांच (खून की जांच) और एक्स-रे मशीन जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के कारण इन संसाधनों का लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है।
देखभाल के अभाव में करोड़ों के उपकरण धूल फांक रहे हैं। इस अस्पताल के नाम पर हर साल लाखों रुपये का भारी-भरकम बजट आता है, लेकिन उसकी सही मानिटरिंग न होने से स्थिति जस की तस बनी हुई है। स्वास्थ्य केंद्र की इस बदहाल और लचर व्यवस्था ने स्थानीय स्वास्थ्य प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों ने जिलाधिकारी एवं स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकर्षित करते हुए मांग की है कि सीएचसी बरुइन की व्यवस्थाओं की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही, नदारद रहने वाले स्वास्थ्य कर्मियों और डॉक्टरों पर कड़ी कार्रवाई करते हुए अस्पताल का संचालन सुचारू रूप से सुनिश्चित किया जाए, ताकि गरीब ग्रामीणों को समय पर समुचित इलाज मिल सके
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