महान स्वतंत्रता सेनानी एवं अमर हुतात्मा स्वामी श्रद्धानन्द जी के बलिदान शताब्दी समारोह को बतौर मुख्य अतिथि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया सम्बोधित

विकसित भारत के निर्माण में गुरुकुलीय शिक्षा की भूमिका अहम: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु
* गुरुकुल कुरुक्षेत्र में स्वामी श्रद्धानन्द बलिदान शताब्दी समारोह में शामिल हुईं राष्ट्रपति
* कहा—'जेन-जी' पीढ़ी गुरुकुल के विद्यार्थियों के अनुशासन और संस्कारों से ले प्रेरणा
* गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी रहे उपस्थित
कुरुक्षेत्र:
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को पूरा करने में गुरुकुलीय शिक्षा पद्धति अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
गुरुकुल मात्र किताबी ज्ञान देने वाले संस्थान नहीं हैं, बल्कि ये चरित्र निर्माण, अनुशासन, नैतिक मूल्यों और राष्ट्रप्रेम को मजबूत करने वाले केंद्र हैं। राष्ट्रपति रविवार को गुरुकुल कुरुक्षेत्र में महान स्वतंत्रता सेनानी एवं अमर हुतात्मा स्वामी श्रद्धानन्द जी के बलिदान शताब्दी समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रही थीं।
कार्यक्रम का शुभारंभ उन्होंने दीप प्रज्वलित कर तथा स्वामी श्रद्धानन्द के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया। स्वामी श्रद्धानन्द का जीवन सामाजिक समरसता की मिसाल
समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि स्वामी श्रद्धानन्द जी ने सामाजिक एकता और सद्भाव के लिए आजीवन कार्य किया।
जामा मस्जिद की मिंबर से वैदिक मंत्रों का उपदेश देना उनके उदार चिंतन और आपसी भाईचारे का अद्वितीय उदाहरण था। राष्ट्रपति ने गुरुकुल के विद्यार्थियों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी (जेन-जी) को इन विद्यार्थियों के अनुशासन, आत्मविश्वास और संस्कारों से प्रेरणा लेनी चाहिए।
प्रतिष्ठित संस्थानों और सेना में गुरुकुल का योगदान
समारोह में गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने गुरुकुल की उपलब्धियों का विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि गुरुकुल कुरुक्षेत्र ने पिछले दस वर्षों में एनडीए के माध्यम से देश को 100 से अधिक सैन्य अधिकारी दिए हैं।
इसके साथ ही 150 से अधिक विद्यार्थियों ने आईआईटी, एनआईटी, आईआईआईटी और मेडिकल संस्थानों में स्थान प्राप्त किया है। गुरुकुल का प्राकृतिक कृषि फार्म भी किसानों को रसायनमुक्त खेती की दिशा दिखा रहा है।
राष्ट्र निर्माण में शिक्षा ही सशक्त माध्यम: राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री
हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने स्वामी श्रद्धानन्द जी के त्याग और तपस्या को नमन करते हुए कहा कि उनका स्पष्ट मानना था कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल आजीविका नहीं, बल्कि चरित्रवान नागरिक तैयार करना है।
वहीं, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि स्वामी जी ने अशिक्षा और सामाजिक कुरीतियों के दौर में शिक्षा, सामाजिक सुधार और राष्ट्र जागरण को ध्येय बनाया। उनके विचारों की विरासत पर चलकर ही आत्मनिर्भर और विकसित भारत का निर्माण संभव है।
देशभर से जुटे प्रतिनिधि
कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर डीएवी प्रबंधकर्त्री सभा के प्रधान पद्मश्री डॉ.
पूनम सूरी, सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा के प्रधान सुरेन्द्र कुमार आर्य, गुरुकुल के प्रधान राजकुमार गर्ग, निदेशक ब्रिगेडियर (डॉ.) प्रवीण कुमार शर्मा, प्राचार्य सूबे प्रताप, सीतापुर से जिला मंत्री जिला आर्य प्रतिनिधि सभा नरेश चन्द्र, शाहजहांपुर से राकेश सिंह एडवोकेट सहित उत्तर प्रदेश व अन्य राज्यों से आए हजारों आर्य समाज प्रतिनिधि और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। मंच संचालन वैदिक विद्वान डॉ.
राजेन्द्र विद्यालंकार ने किया।
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