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हूतियों ने मार गिराया F-15 लड़ाकू विमान! ईरान ने सऊदी अरब के खिलाफ चारों तरफ से कसा शिकंजा

16 Sep 2026, 07:49 PM • BB India News
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हूतियों ने मार गिराया F-15 लड़ाकू विमान! ईरान ने सऊदी अरब के खिलाफ चारों तरफ से कसा शिकंजा

 

Saudi Arabia: सऊदी को 2018 की तुलना में ‘कई और तरह की चुनौतियों’ का सामना करना पड़ रहा है। MBS के पास कुछ ही अच्छे विकल्प हैं। उनके लिए हर मोर्चे पर एक परीक्षा है। यह किंगडम में उनके नेतृत्व की परीक्षा है। ईरान ने सऊदी को चारों तरफ से घेर लिया है।

houthi shot down suadi f-15 fighter jet
रियाद/तेहरान: यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब को बहुत बड़ा झटका देते हुए उसके एफ-15 लड़ाकू विमान को मार गिराया है। हूती विद्रोहियों ने आधिकारिक तौर पर दावा किया है कि इस युद्धक विमान को निशाना बनाने के लिए स्थानीय स्तर पर बने मिसाइल का इस्तेमाल किया गया था। हूती गुट के सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने सोशल मीडिया पर कहा ‘अल्लाह की मदद और कृपा से यमनी सशस्त्र बल सऊदी अरब के F-15 फाइटर जेट को मार गिराने में सफल रहे। यह जेट मारिब प्रांत के हवाई क्षेत्र में अपनी सैन्य गतिविधियों के समर्थन में हमले कर रहा था।’

इसके अलावा हूती प्रवक्ता ने सऊदी अरब पर 450 हमले करने का आरोप भी लगाया। याह्या सरी ने कहा कि जेट को ‘स्थानीय स्तर पर बनी हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल’ से निशाना बनाया गया है। हूती प्रवक्ता ने सऊदी अरब के उन दावों को भी खारिज कर दिया कि हूती विद्रोहियों ने इस पवित्र इस्लामिक शहर मक्का को निशाना बनाया है। उन्होंने कहा ‘हमारे ऑपरेशन सऊदी अरब की तेल सुविधाओं और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हैं जो पवित्र स्थलों से काफी दूर हैं।’

ईरान ने सऊदी अरब को चारों तरफ से घेरा

ईरान ने सऊदी अरब को चारों तरफ से घेर लिया है और प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अकेले पड़ गये हैं। उन्होंने पिछले हफ्ते अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को दो बार टेलीफोन किया था। लेकिन अमेरिका ने हूतियों के खिलाफ लड़ाई में उनकी मदद से इनकार कर दिया। अब हूती विद्रोही लाल सागर में बाब अल-मंदेब के पास पहुंच चुके हैं और उन्होंने सऊदी अरब के तेल जहाजों को रोक दिया है। वे सऊदी अरब के दक्षिणी प्रांतों में मौजूद ऊर्जा सुविधाओं पर लगातार मिसाइलें और ड्रोन भी दाग ​​रहे हैं। साथ ही इराक में शिया उग्रवादियों के उत्तर से किए गए हमले के कारण एक जरूरी तेल पाइपलाइन को बंद करना पड़ा।

दक्षिणी सीमा से यमन से खुला मोर्चा- यमन में हूती विद्रोही स्वदेशी और ईरानी तकनीक से लैस ‘सरफेस-टू-एयर’ मिसाइलों से सऊदी वायुसेना के F-15 जैसे लड़ाकू विमानों को निशाना बना रहे हैं। मारिब, तइज और सादा क्षेत्रों में सऊदी ठिकानों पर लगातार ड्रोन और मिसाइल हमलों से रियाद का दक्षिणी सुरक्षा कवच को बहुत हद तक तोड़ दिया गया है।

उत्तरी सीमा से इराक और सीरियाई मिलिशिया- इराक और सीरिया में सक्रिय ईरान समर्थक शिया गुट सऊदी अरब की उत्तरी सीमाओं और रणनीतिक तेल इन्फ्रास्ट्रक्चर के करीब अपनी सैन्य मौजूदगी और ड्रोन क्षमताओं को लगातार मजबूत कर रहे हैं।

समुद्री और व्यापारिक मार्ग की नाकेबंदी- लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में हूतियों ने जहाजों और तेल टैंकरों का गुजरना बंद कर दिया है। इन हमलों ने सऊदी अरब के समुद्री व्यापार और ऊर्जा निर्यात के सुरक्षित गलियारों पर सीधा खतरा पैदा कर दिया है।

होर्मुज स्ट्रेट पहले से ही बंद- ईरान ने पहले से ही होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर रखा है। सऊदी अरब जिसकी अर्थव्यवस्था अभी भी तेल से ही संचालित होती है उसके लिए अब तेल निर्यात करना मुश्किल हो गया है। उसने यूरोपीय देशों को जानकारी दी है कि तेल निर्यात पर गंभीर असर होगा।

चैथम हाउस के एसोसिएट फेलो नील क्विलियम ने फाइनेंशियल टाइम्स से कहा कि सऊदी को 2018 की तुलना में ‘कई और तरह की चुनौतियों’ का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा ‘MBS के पास कुछ ही अच्छे विकल्प हैं। उनके लिए हर मोर्चे पर एक परीक्षा है। यह किंगडम में उनके नेतृत्व की परीक्षा है… यह सुरक्षा और अर्थव्यवस्था से जुड़ी एक चुनौती है।’ हालांकि वॉशिंगटन के साथ उनके रिश्ते मजबूत हैं लेकिन ‘यह साफ है कि अमेरिका सैन्य तरीके से इसका समर्थन नहीं करेगा।’ अमेरिका सऊदी को सैन्य जानकारियां दे रहा है और सऊदी एयरफोर्स को टारगेट की जानकारी दे रहा है। लेकिन ये काफी नहीं है।

अमेरिका ने सऊदी को हवाई सुरक्षा देने से किया इनकार

फाइनेंशियल टाइम्स ने एक राजनयिक के हवाले से बताया है कि रियाद ने अमेरिका से हवाई सुरक्षा मांगी थी लेकिन वॉशिंगटन ने जवाब दिया कि वह अभी दखल देने को तैयार नहीं है क्योंकि उसका ध्यान ईरान के साथ चल रही लड़ाई पर है। ऐसे में सऊदी अरब के सामने समस्या ये है कि वो हूतियों को हराने के लिए युद्ध करे या फिर अपने तेल संयंत्रों को बचाए? उसके लिए तेल के उत्पादन और निर्यात की क्षमता बनाए रखना ज्यादा जरूरी है।

अमेरिका स्थित रिस्क एडवाइजरी फर्म ‘बाशा रिपोर्ट’ के संस्थापक मोहम्मद अल-बाशा ने एफटी से कहा कि हाल के दिनों में यमन के दक्षिणी तट पर मोर्चे स्थिर हो गए हैं और बाब अल-मंदेब के आस-पास का इलाका ‘नो मैन्स लैंड’ बन गया है। उन्होंने कहा ‘ऐसे हालात हो सकते हैं जिनमें सऊदी-नेतृत्व वाला गठबंधन हूतियों को पीछे धकेल सके, लेकिन अभी हम मोर्चों को स्थिर करने की सबसे अच्छी स्थिति में हैं।’ उन्होंने कहा ‘मुझे नहीं लगता कि सऊदी अभी कोई समझौता करेंगे क्योंकि हूतियों की शर्त पूरी तरह से समर्पण की है।’
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