
विवाद के बाद सोमालिया ने साइप्रस को लेकर अपना रुख़ साफ़ किया

सोमालिया के विदेश मंत्रालय ने साइप्रस के मुद्दे पर अपने रुख़ को लेकर स्पष्टीकरण जारी किया है.
मंत्रालय ने कहा कि साइप्रस को लेकर सोमालिया की नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है और यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संबंधित प्रस्तावों पर आधारित है.
सोमालिया ने साइप्रस की संप्रभुता, स्वतंत्रता, एकता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति अपना पूरा सम्मान दोहराया.
दरअसल, सोमालियाई संसद के हाउस ऑफ़ पीपल्स के स्पीकर अब्दुल कादिर मोहम्मद नूर ने स्पीकर बनने पर बधाई देने के लिए टर्किश रिपब्लिक ऑफ नॉर्दर्न साइप्रस की संसद के स्पीकर को धन्यवाद दिया था.
हालांकि, उनका यह पोस्ट अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मौजूद नहीं है.
अब्दुल कादिर मोहम्मद नूर 10 अगस्त को हाउस ऑफ़ पीपल्स के स्पीकर चुने गए थे.
विदेश मंत्रालय ने यह भी दोहराया कि सोमालिया संयुक्त राष्ट्र की देखरेख में साइप्रस विवाद के शांतिपूर्ण, बातचीत के जरिए और स्थायी समाधान का समर्थन करता है.
दरअसल साइप्रस 1974 से बंटा हुआ है. दक्षिण में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त साइप्रस गणराज्य है, जबकि उत्तर में टर्किश रिपब्लिक ऑफ नॉर्दर्न साइप्रस है, जिसे सिर्फ़ तुर्की मान्यता देता है.
संयुक्त राष्ट्र साइप्रस के एकीकरण के लिए दोनों पक्षों के बीच बातचीत का समर्थन करता है.
संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत साइप्रस की संप्रभुता, स्वतंत्रता, एकता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए.
साइप्रस के मामले में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने प्रस्ताव 541 (1983) और प्रस्ताव 550 (1984) के जरिए उत्तरी साइप्रस में घोषित अलग राज्य को मान्यता न देने और साइप्रस की एकता बनाए रखने की स्थिति दोहराई है.


