गाजीपुर में गैंगस्टर एक्ट के आरोपी से जुड़े मकान पर प्रशासन की कार्रवाई

बहरियाबाद ( गाजीपुर ) थाना क्षेत्र के ग्राम पलिवार में बुधवार को पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने गैंगस्टर एक्ट के एक मामले से जुड़े चंद्रशेखर राम के मकान पर कार्रवाई की। प्रशासन के अनुसार, मकान ग्राम सभा की जमीन पर बना हुआ था और राजस्व विभाग की नाप-जोख में निर्माण सरकारी भूमि पर पाया गया। इसके बाद उपजिलाधिकारी जखनिया के आदेश के अनुपालन में जेसीबी से मकान को ध्वस्त कर दिया गया।
पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई थाना बहरियाबाद में दर्ज मु0अ0सं0 160/2026, धारा 3(1) उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम से संबंधित है। पुलिस का कहना है कि मामले में दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद गैंगलीडर बताए जा रहे चंद्रशेखर राम से जुड़े निर्माण की जानकारी सामने आई।
प्रशासन के अनुसार ग्राम पलिवार में चंद्रशेखर राम द्वारा बनाए गए पक्के मकान की जमीन को लेकर जांच कराई गई। उपजिलाधिकारी जखनिया के निर्देश पर राजस्व निरीक्षक और लेखपाल की टीम ने मौके पर पहुंचकर जमीन की पैमाइश की।
राजस्व विभाग की रिपोर्ट के अनुसार निर्माण ग्राम सभा की भूमि पर पाया गया। इसके बाद प्रशासन ने निर्माण को अवैध मानते हुए उसे हटाने की कार्रवाई की।
बुधवार को राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची। पुलिस बल की मौजूदगी में जेसीबी की मदद से मकान को ध्वस्त किया गया। अधिकारियों के अनुसार कार्रवाई प्रशासनिक आदेश और राजस्व जांच के आधार पर की गई।
हालांकि, ऐसी कार्रवाई में प्रभावित व्यक्ति के लिए उसके स्वामित्व, कब्जे, राजस्व अभिलेखों और पूर्व से मौजूद दावे/आपत्तियों का कानूनी परीक्षण महत्वपूर्ण होता है। यदि संबंधित व्यक्ति के पास जमीन या निर्माण के संबंध में कोई वैध दस्तावेज अथवा आपत्ति है, तो वह सक्षम न्यायालय या संबंधित राजस्व प्राधिकारी के समक्ष अपना पक्ष रख सकता है।
मकान गिराए जाने की कार्रवाई का सीधा असर उस मकान में रहने वाले परिवार पर पड़ता है। इसलिए केवल पुलिस या प्रशासन के आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति को अंतिम रूप से दोषी मानना उचित नहीं है। गैंगस्टर एक्ट में मामला दर्ज होना अपने आप में दोषसिद्धि नहीं है, और आपराधिक मामले का अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा किया जाता है।
इसी तरह सरकारी जमीन पर निर्माण को लेकर भी राजस्व अभिलेख, पैमाइश, कब्जे की स्थिति और संबंधित व्यक्ति की आपत्ति जैसे पहलुओं का न्यायिक परीक्षण महत्वपूर्ण हो सकता है।
यदि चंद्रशेखर राम या उनके परिवार की ओर से इस कार्रवाई के खिलाफ कोई आपत्ति, दस्तावेज या न्यायालयी आदेश प्रस्तुत किया जाता है, तो उसका पक्ष भी मामले की पूरी तस्वीर समझने के लिए महत्वपूर्ण होगा।
कार्रवाई के दौरान तहसीलदार नीरज चतुर्वेदी, राजस्व निरीक्षक धीरेन्द्र सिंह, सुधाकर पांडे, लेखपाल सौरभ सिंह, जितेंद्र यादव, महेंद्र प्रजापति, आशुतोष पांडे, अंकित राय, अर्जित शुक्ला, दिव्यांगनी और साधना सहित राजस्व विभाग की टीम मौजूद रही।
वहीं बहरियाबाद थानाध्यक्ष बासदेव प्रसाद, उपनिरीक्षक सुरेश कुमार बिंद तथा सादात थाना के उपनिरीक्षक सुरेंद्र कुमार मिश्रा पुलिस बल के साथ मौके पर तैनात रहे।
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