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लालच से बाहर

माता सीता ने सोने के हिरन का भर्म किया इससे कहीं ज्यादा दुखद यह था कि भगवान राम उसके पीछे गए उसे भेदने को। दोनों अपने समय के विद्वान थे किंतु ‘विनाश काले विपरीत बुद्धि’

यह सत्य है कि इसमें कोई दो राय नहीं हो सकती है कि आप यह सोचे यह भगवान की लीला थी,किंतु मैं यह कहूंगा यहां भगवान ने हमें समझाने की कोशिश की है कि अगर हम किसी लालच में फंसे तो कष्ट के भागी होंगे। अधर्म स्वार्थ और घृणा से भरा कोई आतताई आपको अपनी धूर्तता से झूठ का दिवास्वप्न दिखा रहा हो ,और दुखद यह है कि आप उसकी कूटनीति का शिकार हो जाओ,तो इसे सिर्फ आपकी मूर्खता ही माना जाएगा,जबकि बार-बार आप देख रहे हो कि मां सीता तो सिर्फ एक बार अपहरण की गई किंतु आपका तो सैकड़ों बार अपहरण किया जा रहा है। भर्म के जंगल में भटकने को रोक बाहर निकलो धूर्तता की मिठास का असली कड़वापन पहचानो। यू हर बार लालच में आकर अपना और अपनों का अपहरण मत होने दो।
क्योंकि आप को समझना होगा सत्य यही है की सोने का  हिरण नहीं होता यह सिर्फ झूठ का भ्रम है।
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