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*पानी निकासी को लेकर ग्राम प्रधान और ग्रामीणों के बीच वाद – विवाद अब और गहराया*

ग़ाज़ीपुर जनपद अंतर्गत ज़मानिया तहसील के गायघाट गांव में पानी निकासी को लेकर ग्राम प्रधान और ग्रामीणों के बीच उपजा विवाद अब गहराता जा रहा है।
एक तरफ जहाँ खेतों और रास्तों के जलमग्न होने से किसानों और स्कूली बच्चों का भविष्य दांव पर लगा है, वहीं दूसरी तरफ सरकारी धन के दुरुपयोग और भूमि पर अवैध कब्जे के गंभीर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री पोर्टल से लेकर उपजिलाधिकारी (एसडीएम) तक गुहार लगाई है, लेकिन अब तक धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
स्थानीय निवासी बृजेश कुमार मौर्य ने इस गंभीर समस्या को लेकर मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल (आईजीआरएस) पर शिकायत दर्ज कराई है। बृजेश मौर्य का कहना है कि यह समय किसानों के लिए धान की फसल लगाने का है, लेकिन पानी रोक दिए जाने के कारण उनके खेत तालाब में तब्दील हो चुके हैं।
इसके अलावा, मुख्य मार्ग पर लगातार पानी बहने के कारण सड़क पर भारी मात्रा में काई (एलगी) जम गई है। बृजेश ने तंज कसते हुए और आक्रोश जताते हुए कहा:
“सड़क की स्थिति ऐसी हो चुकी है कि यहाँ से गुजरने पर पैर फिसलने की 101% गारंटी है। इसके बावजूद प्रशासन गहरी नींद में सोया हुआ है और कोई निवारण नहीं किया जा रहा।”
ग्रामीणों के अनुसार, उन्होंने ग्राम प्रधान धर्मेंद्र कुशवाहा से मान-मनौव्वल करते हुए कहा था कि “कम से कम बरसात भर पानी निकलने दिया जाए, बरसात बीतने के बाद इसका कोई स्थाई निर्णय ले लिया जाएगा।” लेकिन इस अपील का कोई असर नहीं हुआ। मामले को लेकर ज़मानिया उपजिलाधिकारी (एसडीएम) को भी पत्रक सौंपा गया है, परंतु अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई।
स्थानीय निवासी हरिओम मौर्या ने बताया कि पानी की सुचारू निकासी न होने से कई किसानों की खेत पूरी तरह डूब चुके हैं। उन्होंने एक और गंभीर समस्या की ओर इशारा करते हुए कहा कि क्षेत्र का प्रतिष्ठित ‘आदर्श विद्यापीठ इंटर कॉलेज’ खुल चुका है। लेकिन विद्यालय जाने वाले मुख्य मार्ग पर घुटनों तक पानी और काई होने के कारण नौनिहाल स्कूल कैसे पहुंचेंगे? बच्चों के साथ कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
जब इस पूरे मामले पर ग्राम प्रधान धर्मेंद्र कुशवाहा से जानकारी ली गई, तो उन्होंने आरोपों को सिरे से नकारते हुए मामले में एक नया मोड़ ला दिया। प्रधान धर्मेंद्र कुशवाहा का कहना है कि:
जिस रास्ते और पानी निकासी की बात की जा रही है, वहाँ दोनों तरफ मिलाकर लगभग 2 बीघा से अधिक सरकारी भूमि है, जिस पर कुछ रसूखदार लोगों ने जबरन अवैध कब्जा कर रखा है।
अब तक बगल के कुछ किसानों ने प्रेमपूर्वक अपनी निजी भूमि से पानी निकलने का रास्ता दिया था। लेकिन अब वे किसान अपनी निजी भूमि में फसल उगाना चाहते हैं। ऐसे में उन पर अपनी जमीन छोड़ने के लिए दबाव क्यों बनाया जाए?
जब इतनी बड़ी चौड़ी सरकारी बंजर भूमि (रास्ता) उपलब्ध है, तो प्रशासन उस पर से कब्जा हटाकर पानी और रास्ते की स्थाई व्यवस्था क्यों नहीं कराता?
ग्राम प्रधान के इस बयान के बाद गायघाट के निवासियों ने प्रशासन और व्यवस्था पर तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह पानी निकासी का मार्ग सरकारी नहीं है और यह किसी की निजी (नंबर) भूमि है, तो फिर शासन द्वारा यहाँ 32 से 38 लाख रुपये की लागत से सरकारी पुल (पुलिया) का निर्माण क्यों और किसके लिए कराया गया?
“अगर यह जमीन किसी की पर्सनल (निजी) है, तो सरकारी धन का इस्तेमाल किसी व्यक्ति विशेष को लाभ पहुंचाने के लिए कैसे किया जा सकता है? यह तो सीधा-साधा सरकारी पैसे का घोटाला है, इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।” वहीं मुख्यमंत्री पोर्टल पर की गई शिकायत पर अभयपुर पुलिस चौकी इंचार्ज अजय कुमार भारतीय ने उक्त स्थान पहुंच कर जायजा लिया और बृजेश मौर्या तथा धर्मेन्द्र कुशवाहा से मौके बात करते हुए जल्द -जल्द हल कराने की बात कही l
गायघाट में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। एक तरफ जलभराव से त्रस्त किसान और स्कूली बच्चे हैं, दूसरी तरफ बंजर भूमि पर कब्जे का दावा और तीसरी तरफ लाखों रुपये के सरकारी बजट के दुरुपयोग की बू। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी ग़ाज़ीपुर और शासन से मांग की है कि तत्काल प्रभाव से मौके का स्थलीय निरीक्षण (पैमाइश) कराया जाए, ताकि बंजर भूमि से अवैध कब्जा हट सके, पानी की निकासी सुचारू हो और इस कथित ‘घोटाले’ की सच्चाई सामने आ सके।

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