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हर घर नल, हर घर जल’ योजना की उड़ रही धज्जियां

जमानिया (ग़ाज़ीपुर) उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘हर घर नल, हर घर जल’ किस कदर दम तोड़ रही है, इसका जीता-जागता उदाहरण गांव अभयपुर में देखने को मिल रहा है।
आज 3 जून 2026 दिन बुधवार को जहाँ एक तरफ सरकार हर ग्रामीण परिवार तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ अभयपुर में लाखों की लागत से बनी पानी की टंकी जनता के काम आने की बजाय प्रशासनिक लापरवाही और ठेकेदारों की मनमानी की भेंट चढ़ रही है।

स्थानी ग्रामीणों के मुताबिक, कंपोजिट विद्यालय अभयपुर के ठीक सामने और पानी की टंकी से लगभग 250 मीटर दक्षिण दिशा में खुले नलों से लगातार पानी का बहाव जारी है। जब संवाददाता जानकारी के लिए पहुंचे तो पानी पीने के बजाय रास्ते पर बहता हुआ नजर आया, साथ में भीषण गर्मी के इस मौसम में जहाँ एक-एक बूंद पानी के लिए हाहाकार मचा है, वहीं यहाँ रोजाना सैकड़ों लीटर पानी सड़कों पर बहकर बर्बाद होना बड़ी लापरवाही सामने आ रहा है।

जब इस बर्बादी को लेकर जल संचालक आकाश सिंह से बात की गई, तो उन्होंने अपनी बेबसी जाहिर करते हुए ग्रामीणों पर ही ठीकरा फोड़ दिया। आकाश सिंह ने कहा:
“मैंने गाँव के सभी खुले नलों में टोटियाँ (टीप) लगवा दी थीं, लेकिन वे सब चोरी हो गईं। अब इसमें मैं क्या करूँ? बार-बार अपने पास से कितनी नई टोटियाँ लाकर लगाऊँ?”उसके बाद ठीकेदार को सूचना दे कर बुलाया जो अपना नाम विकास यादव बताए उन्होंने कहा कि पानी की टोटी लगाना मेरा काम है ना कि बैठ कर निगरानी करना, जिसके पास से गायब होता है उनकी पूर्ण जिम्मेदारी संभालने की है l

दूसरी ओर, ग्राम प्रधान आशा सिंह के सहयोगी रामानुज सिंह उर्फ पप्पू सिंह ने जल निगम के अधिकारियों और ठेकेदारों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने आक्रोश जताते हुए कहा: कि “जल निगम की घोर मनमानी और घटिया कार्यशैली के कारण आज गाँव के हर घर तक पानी नहीं पहुँच पा रहा है। यहाँ ठेकेदारों ने सिर्फ अपना जेब भरा और काम अधूरा छोड़कर निकल गए। जनता आज भी पानी के लिए तरस रही है।”

लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी ग्रामीणों को इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। पाइपलाइन बिछाने और कनेक्शन देने के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गई है। अब देखना यह होगा कि इस खबर के सामने आने के बाद जल निगम के उच्च अधिकारी और जिला प्रशासन इन भ्रष्ट ठेकेदारों पर क्या कार्रवाई करता है, और अभयपुर के ग्रामीणों को उनके हक का पानी कब तक मिल पाता है।

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