
सरकार ने प्रत्येक ग्राम पंचायत में 15 से 20 लाख रुपए की लागत से पंचायत भवनों का निर्माण कराया था। इन भवनों में कामकाज संचालित करने के लिए पंचायत सहायकों की नियुक्ति भी की गई, लेकिन अधिकारियों की उदासीनता के कारण ये भवन उपयोग में नहीं आ रहे हैं।
भदौरा ब्लॉक क्षेत्र में कुल 46 ग्राम पंचायतें हैं, जहां ये भवन बनाए गए हैं। सभी ग्राम पंचायतों में पंचायत सहायकों की नियुक्ति हुई है और ग्राम पंचायत अधिकारियों को भी यहीं बैठने के निर्देश गए दिए है।कंप्यूटर , कुर्सी मेज, आलमारी और इन्वर्टर जैसे उपकरण भी खरीदे गए थे, लेकिन आरोप है कि ये सभी समान प्रधानों के घरों की शोभा बढ़ा रहे है। पंचायत सहायक बिना काम किए हर महीने मानदेय ले रहे है। जब कि पंचायत अधिकारी भी ब्लॉक मुख्यालय से ही अपना काम काज निपटाते है। ग्रामीणों को परिवार रजिस्टर की नकल जैसे बुनियादी सुविधाएं भी तभी मिल पाती है, जब वे दो चार दिन तक ब्लॉक कार्यालय के चक्कर काटते है। बारा, गहमर कुतुबपुर मांगरखाई, रोईनी और भतौरा सहित भदौरा ब्लॉक क्षेत्र के कई पंचायत भवनों में अक्सर ताला लटका रहता है। ग्रामीण उमैर खान, भीम मास्टर, जयप्रकाश राय और अप्पू श्रीवास्तव ने बताया कि पंचायत भवन महीने में मुश्किल से एक दो बार ही खुलते है और पंचायत कार्यों की कोई जानकारी नहीं मिलती। इससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। इस संबंध में बीडीओ भदौरा केके सिंह ने बताया कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में पंचायत सहायक, सचिव, सफाई कर्मी और ग्राम प्रधान सभी को पंचायत भवनों में बैठ कर ग्रामीणों की समस्या सुनकर उनका समाधान करना है। उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि वे पंचायत भवनों में नहीं बैठ रहे हैं तो इसकी जांच कराई जाएगी।
