पुलिस को हत्यारोपी ने दिया घटना की जानकारी,छह बोरियों में शवो को काटकर गोमती नदी में फेंका
जफराबाद जौनपुर से राजेश कुमार यादव की खास रिपोर्ट
क्षेत्र के अहमदपुर निवासी श्यामबहादुर तथा उनकी पत्नी बबिता की हत्या उनके बेटे अम्बेश ने ही किया था।उसने अपनी बहनों को यह जानकारी 15 दिसम्बर को ही दे दिया था। एक बहन की तहरीर पर पुलिस ने उसके विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया।उसके बाद 16 दिसम्बर को पुलिस ने आरोपी को घर के पास से ही दबिश देकर गिरफ्तार कर लिया।
अम्बेश कुमार ने पुलिस को बताया कि आठ दिसम्बर की रात सात से आठ बजे के बीच उसका उसकी माँ बबिता से पैसे तथा पारिवारिक विवाद को लेकर कहासुनी होने लगी।मेरी माँ ने मुझे घर से निकल जाने को कहा।मैंने उनको जवाब दिया यह घर मेरी नानी ने मुझे नेवासा में दिया है।आप दोनो घर छोड़ कर जाईये।इस पर माँ ने धक्का देकर भगाने लगी।इस पर अम्बेश ने माँ को लोहे के खल बट्टे के रॉड से सिर और मार दिया।जिससे वह गिरकर छटपटाने लगी।उसी समय उसके पिता भी पहुंच गए।उन्होंने पुलिस को फोन करना चाहा जिस पर उसी बट्टे के रॉड से उसने अपने पिता के भी सिर पर वार कर दिया।वह चिल्लाने लगे जिसपर एक बार फिर उसी रॉड से दुबारा मारा।तब भी वे चिल्लाने का प्रयास करने लगे। उसके बाद अंबेश ने पिता का गला रस्सी से कस दिया।थोड़ी देर में माँ बाप की सांस रुक गयी।पहले तो अम्बेश घबराया उसके बाद लाशों को छिपाने के लिए उसने लोहा का सरिया काटने वाली आरी से दोनो लाशों को तीन तीन भागों में काटा।उसके बाद छह प्लास्टिक की बोरियों में दोनो की लाश तथा एक बोरी में अन्य खून आदि अवशिष्ट को एक अन्य प्लास्टिक की बारी में भरा।उसके बाद अपनी कार में ऊक्त बोरियों को भरकर भोर में गोमती नदी के बेलाव पूल पर ले जाकर फेंक दिया।उसके बाद घर आकर कार सहित कार की डिग्गी, घर का फर्श को धोकर साफ कर दिया।सफाई के दौरान उसने देखा कि उसकी माँ का एक कटा हुआ पैर घर में छूट हुआ था।उसी समय उसने उस पैर को एक झोले में लेकर जलालपुर ले जाकर पूल से सई नदी में फेंक दिया।घटना में प्रयुक्त लोहे का लोढ़ा, लोहा काटने वाली आरी,माँ बाप की मोबाइल को घर के दूसरे तले पर रखे बालू में छिपा दिया।इस दौरान जब अम्बेश की बहनों ने फोन किया तो अम्बेश ने कहा दोनो आठ दिसम्बर की रात को कही घूमने गए है।मैं दोनो को खोज रहा हु।बहनों ने पुलिस से शिकायत करने का दबाव बनाया तो डर के कारण अम्बेश फोन बन्द करके जौनपुर स्टेशन,वाराणसी के गंगा घाटों पर घूमने लगा।अम्बेश का भी फोन बन्द आने और घबराकर तीनों बहनों ने 13 दिसम्बर को माँ बाप तथा अम्बेश की गुमशुदगी लिखवाया था।15 दिसम्बर को अम्बेश घर वापस आया।घर मे दूसरा ताला लगा था।उसने अपनी बहनों से इस बारे में पूछा।तीनो पहुंच गयी।उन्होंने जब अम्बेश से माँ बाप के बारे में पूछा तब वह सारी घटना बहनों को बता दिया।दूसरे नम्बर की बहन अर्चना ने भाई के विरुध्द माँ बाप के हत्या का मुकदमा दर्ज कराया।
थानाध्यक्ष श्रीप्रकाश शुक्ल के साथ चौकी प्रभारी राधेश्याम सिंह,पंकज पुरी, प्रवीन राय, प्रदीप यादव मौके पर पहुंचे और अम्बेश को गिरफ्तार करके उसके निशानदेही पर सारा सामान बरामद कर लिया।
