तहसीलदार के आदेश की अवहेलना, धड़ल्ले से जारी निर्माण
भटगांव से एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है, जहां तहसीलदार न्यायालय के स्पष्ट स्थगन आदेश को खुलेआम चुनौती दी जा रही है। प्रशासन के आदेश के बावजूद संवरा समाज द्वारा विवादित भूमि पर धड़ल्ले से भवन निर्माण जारी है। सवाल यह है—क्या कानून सबके लिए बराबर है?
तहसीलदार भटगांव द्वारा चार दिसंबर दो हजार पच्चीस को आदेश क्रमांक 223 के तहत निर्माण कार्य पर अंतरिम रोक लगाई गई थी। आदेश में यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश थे, लेकिन मौके पर इसके ठीक उलट तस्वीरें सामने आ रही हैं।
आवेदक परमेश्वर प्रसाद का आरोप है कि उनकी निजी भूमि की पत्थर की दीवार तोड़कर संवरा समाज के उपाध्यक्ष रामकुमार द्वारा अवैध निर्माण शुरू किया गया। उन्होंने तहसीलदार न्यायालय से रोक लगाने की मांग की थी।
पटवारी जांच में भी गंभीर गड़बड़ी सामने आई है। जहां संवरा समाज को मात्र तीस बाय तीस फीट भूमि आबंटित बताई गई है, वहीं निर्माण पैंसठ बाय चौवन फीट क्षेत्र में किया जा रहा है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आदेश के उल्लंघन के बावजूद तहसीलदार भटगांव द्वारा अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। संवाददाता द्वारा लगातार दो दिनों तक संपर्क करने के बावजूद फोन नहीं उठाया गया।
मामला एसडीएम बिलाईगढ़ तक पहुंच चुका है, लेकिन ज़मीन पर कार्रवाई नदारद है। अब सवाल उठता है—क्या प्रशासन न्यायालय के आदेश की गरिमा बचाएगा या प्रभावशाली लोगों के आगे कानून कमजोर पड़ जाएगा?
तहसीलदार के आदेश की अवहेलना — प्रशासन मौन क्यों?
