ब्यूरो रिपोर्ट.. अनुराग तिवारी
बांदा.कृषि विपणन एवं कृषि विदेश व्यापार निदेशालय, उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में स्थानीय उत्पादों के भौगोलिक उपदर्षन पंजीयन जी.आई.तथा अधिकृत उपयोगकर्ता विषय पर एक दिवसीय संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पद्यश्री सम्मानित डां. रजनीकान्त, जनरल सेक्रेटरी, ह्यूमन वेलफेयर एसोसियेशन, वाराणसी थे, जो कि जी.आई. मैन आफ इण्डिया के नाम से भी प्रसिद्ध है। विशिष्ठ अतिथि के रूप में डां.दिनेश चन्द्र, सहायक विपरण अधिकारी, चित्रकूटधाम मण्डल, बांदा ने प्रतिभाग किया। इस कार्यशाला में भौगोलिक उपदर्शन जी.आई.से सम्बन्धित विश्वविद्यालय के समस्त प्राधिकारीगण, कृषि जिन्सो, उत्पादों को चिन्ह्ति करने से सम्बन्धित कृषि विपणन एवं कृषि विदेश व्यापार, चित्रकूटधाम मण्डल के अधिकारीगण, विश्वविद्यालय के समस्त निदेशकगण,अधिष्ठातागण, समस्त शैक्षणिक स्टाफ, कृषि विज्ञान केन्द्रों के अधिकारीगण, शोध छात्र/छात्रायें, जिले में भौगोलिक उपदर्शन जी.आई. के लिए कार्य कर रहे गैर सरकारी संगठनों एन.जी.ओ.किसान उत्पादक संगठनों एफ.पी.ओ. आदि ने कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।डां. रजनीकान्त ने बताया कि कृषि जिन्सों तथा इनसे बनने वाले उत्पादों का भौगोलिक उपदर्शन (जी.आई.) पंजीकरण कराया जाना नितान्त आवश्यक है। इससे क्षेत्र के उत्पादों को नई पहचान व उत्पादों के व्यापार को नई दिशा मिलेगी तथा साथ ही भौगोलिक क्षेत्र के उत्पादों को उत्पादित करने वाले समुदाय को विशेष लाभ मिलेगा। उत्पादों का जी.आई. पंजीकृत होने के पश्चात् उक्त उत्पाद को किसी अन्य भौगोलिक क्षेत्र में दिये गये पंजीकृत नाम से उत्पादित नहीं किया जा सकेगा एवं उत्पाद का विपणन केवल पंजीकृत उपयोगकर्ता द्वारा ही किया जा सकेगा। जी.आई. उपरान्त भौगोलिक क्षेत्र के समुदाय का आजीविका वर्धन होगा। डा0 रजनीकान्त के एन.जी.ओ. ह्यूमन वेलफेयर एसोसियेशन, वाराणसी के सहयोग से भारत में अब तक लगभग 496 उत्पादों के जी.आई. हेतु आवेदन कराया गया है। जिनमें से 163 पारम्परिक उत्पादों को जी.आई. प्रदान किया जा चुका है। कार्यशाला में भौगोलिक उपदर्शन आवेदन एवं पंजीकृत उपयोगकर्ता बनने की प्रक्रिया को विस्तृत रूप से समझाया गया एवं जिले के सम्भावित उत्पादों के जी.आई कराने पर चर्चा की गयी। कार्यक्रम का आयोजन डा. ए.के. श्रीवास्तव, निदेशक, पी.एम.ई.सी.एवं डा.जगन्नाथ पाठक,निदेशक, शोध,डां. मुकुल कुमार,अधिष्ठाता, स्नात्कोत्तर अध्ययन एवं उनकी समस्त टीम द्वारा सम्पादित किया गया। कार्यक्रम का संचालन डा. बी.के.गुप्ता, सहायक प्राध्यापक द्वारा किया गया।