*कौन हैं एसपी आरती सिंह, जिन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तुरंत हिरासत में लेने को कहा*
*राजेश कुमार यादव की कलम से*
*प्रयागराज/इलाहाबाद उत्तर प्रदेश*
यूपी सरकार ने हाईकोर्ट से पक्ष रखने का आग्रह किया, जिस पर मंगलवार दोपहर करीब 3:45 बजे कोर्ट में सुनवाई हुई। बाद में, कोर्ट ने सिंह को बुधवार तक व्यक्तिगत हलफनामा दायर करने का समय दिया।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मंगलवार को बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर करने वाले याचिकाकर्ता को धमकाने और वकील को गिरफ्तार कराने के मामले में फर्रुखाबाद की पुलिस अधीक्षक (एसपी) आरती सिंह को अदालत में तब तक बिठाए रखा, जब तक कि वकील रिहा नहीं हो गए। इस केस की सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया तो एसपी से नाराज जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस संजीव कुमार की खंडपीठ ने उन्हें कोर्ट हिरासत में लेने का आदेश दिया।
कौन हैं एसपी आरती सिंह
इस पर यूपी सरकार ने हाईकोर्ट से पक्ष रखने का आग्रह किया, जिस पर मंगलवार दोपहर करीब 3:45 बजे कोर्ट में सुनवाई हुई। बाद में, कोर्ट ने सिंह को बुधवार तक व्यक्तिगत हलफनामा दायर करने का समय दिया। साथ ही एसपी और उनकी पूरी टीम को व्यक्तिगत रूप से सुनवाई में मौजूद रहने का आदेश दिया।
खंडपीठ ने यह आदेश फर्रुखाबाद निवासी प्रीति यादव की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर दिया था। प्रीति यादव ने आरोप लगाया कि 8 सितंबर की रात थाना प्रभारी अनुराग मिश्रा, सीओ समेत चार-पांच पुलिसकर्मी उनके घर में घुसे और दो सदस्यों को हिरासत में ले लिया। दोनों को करीब एक सप्ताह तक हिरासत में रखा। इस दौरान याची से लिखित बयान लिया गया कि वह पुलिस के खिलाफ किसी तरह की शिकायत नहीं करेगी। यादव से बाद में यह भी लिखवाया कि उन्होंने कोई याचिका दाखिल नहीं की है।
सुनवाई के दौरान पुलिस की ओर से प्रीति का यह लिखित बयान पेश किया गया, तो कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए 14 अक्तूबर को अफसरों के हलफनामे के साथ ही याची प्रीति यादव को तलब किया था।
इससे पहले हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अमरेंद्र नाथ सिंह ने बताया, पुलिस को आशंका थी कि फर्रुखाबाद के वकील अवधेश मिश्र ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल कराई है। इससे नाराज पुलिस कर्मियों ने 11 अक्तूबर को अधिवक्ता के घर पर धावा बोल दिया और तोड़फोड़ की। इस संबंध में कोर्ट में अर्जी पेश की गई। इससे नाराज पुलिस ने अवधेश मिश्र को मंगलवार को सुनवाई के बाद कोर्ट के बाहर से गैरकानूनी तरीके से हिरासत में ले लिया। इस पूरे मामले में हाईकोर्ट ने एसपी की कार्यप्रणाली को न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला बताया।
