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नेत्रहीन बालिका बनी ‘नक्सल गढ़ की लता मंगेशकर’, सुरों से जीत रही दिल

CG News: नेत्रहीन बालिका सिर्फ एक गायिका नहीं बल्कि सुकमा की नई ध्वनि, एक उम्मीद और उस विश्वास की प्रतीक है, जिसने दिखा दिया कि सुरों की ताकत, गोलियों की आवाज़ से कहीं ज़्यादा प्रभावशाली होती है।

देश 24 लाइव न्यूज रिपोर्टर राजा खान जिला ब्यूरो बालोद

जहां कभी बंदूक की आवाज़ें गूंजती थीं, आज वहीं अब भक्ति और संगीत की मधुर धुनें सुनाई देने लगी हैं। यह बदलाव संभव हुआ है सुकमा की बेटी सोढ़ी वीरे के सुरों से एक ऐसी नेत्रहीन बालिका जिसने अपनी आवाज़ के ज़रिए न सिर्फ पूरे बस्तर को मोहित किया, बल्कि सुकमा की पहचान को भी नई दिशा दी है। लोग आज उसे स्नेहपूर्वक ‘‘नक्सल गढ़ की लता मंगेशकर’’ कहकर पुकारते हैं।

जिले के सुदूर गांव पोलमपल्ली से आने वाली वीरे ने बचपन में ही अपनी आंखों की रोशनी खो दी थी। जब वह घुटनों के बल चलना सीख रही थी, तभी बीमारी ने उसकी दृष्टि छीन ली। मगर इस अंधकार में भी उसने कभी उम्मीद का दीप बुझने नहीं दिया। उसने आंखों से नहीं, बल्कि आत्मा से दुनिया को महसूस किया और वही भाव उसके सुरों में उतर आया।

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