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मनमाने दाम मे यूरिया बेचने वाले पर क्यों नही हो रही है कोई कार्यवाही

मनमाने दाम मे यूरिया बेचने वाले पर क्यों नही हो रही है कोई कार्यवाही

पंकज चौबे शोहरतगढ,सिद्धार्थनगर
 एक तरफ यूरिया, खाद की उपलब्धता को लेकर चिंतित होना पड़ रहा है। वहीं सरकार द्वारा तय रेट से अधिक दाम पर यूरिया खाद की बिक्री कर हजारों किसानों का आर्थिक शोषण किया जा रहा है, लेकिन कृषि विभाग के जिम्मेदार अधिकारी और प्रशासन शिकायतों का इंतजार कर रहा है। शोहरतगढ तहसील के हर क्षेत्र में खाद की काला बाजारी की जा रही है।वर्तमान दिनों में किसानों को तय सरकारी दाम पर यूरिया मिलना मुश्किल हो रहा है। केवटली,गनेशपुर, सिसवा परसा,महथा,परसोहिया आदि क्षेत्रों में खुले बाजार में मनमाने रेटों पर विक्रेताओं द्वारा खाद बेची जा रही है। क्षेत्र के किसी जनप्रतिनिधियों और नेताओं ने अभी तक खाद की अधिक दामों पर बिक्री को लेकर कोई आपत्ति नहीं ली है। इसलिए हजारों किसान खुद को छला सा महसूस कर रहे हैं।
धान के फसल के रोपाई के बाद फसल में यूरिया की जरूरत है। इसे देख विक्रेताओं ने मनमानी आरंभ कर दी है। विभाग ने यूरिया की 45 किलो की बोरी के दाम 266.50 पैसे निर्धारित किए हैं। इससे कहीं अधिक दामों पर किसानों को खाद उपलब्ध हो रही है। कई सहकारी समितियों में खाद की कमी बनी हुई है। इससे मजबूरन, किसानों को खुले बाजार से खाद खरीदनी पड़ रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापारी मनमाने भाव में खाद बेच किसानों का शोषण करते हैं। किसानों के बिल मांगे जाने पर कोरे कागज पर बिल बनाकर दिया जा रहा है, लेकिन कृषि विभाग के अधिकारी मौन है।बता दें कि गणेशपुर चौराहे के एक निजी दुकान में 330 रुपये यूरिया बेचने का मामला सामने आया। जहां पर एक गांव के एक पीड़ित किसान ने गणेशपुर चौराहे के दुकान से यूरिया और अन्य खाद खरीदी। जिसमें एक यूरिया की बोरी के 330 रुपये दाम वसूले गए।बिल मांगने पर यूरिया नही देने की बात करते है,
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