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*जब गौमाता खुशहाल होंगी तभी राष्ट्र खुशहाल होगा।*

*जब गौमाता खुशहाल होंगी तभी राष्ट्र खुशहाल होगा।*

*गौ माता का महत्व जानने के लिए गौ कथा का आयोजन होना आवश्यक।*

नौ दिवसीय चल रहे श्रीमद् भागवत में कथा व्यास आचार्य राजेश अग्निहोत्री भागवताचार्य ने कहा कि गौ माता का हमारे जीवन में अत्यंत महत्व है कुछ लोग गौ माता को पशु कहते हैं गौ माता पशु नहीं बल्कि हमारी माता है गौमाता को जो लोग पशु कहते हैं उन्हें गौ माता का महत्व नहीं मालूम है गौ माता का लोग महत्व समझ सकें इसीलिए जगह-जगह गौ माता का कथा का आयोजन करना आवश्यक है गौ माता में 33 कोटि देवताओं का निवास होता है। जो रोगी हो या रोग ग्रस्त हों उन्हें गौ माता के मुख के सामने आधा घंटा प्रतिदिन खड़ा होना चाहिए गौ माता अपनी श्वांस से बीमारी के कीटाणु खींच लेती हैं और रोगी को रोग से लाभ मिलता है ।

जब हमारी गौमाता खुशहाल होंगी तभी देश/ राष्ट्र खुशहाल होगा बिना गौमाता के खुशहाली के देश व राष्ट्र का खुशहाल हो पाना असम्भव है।

कथा के दौरान उन्होंने ब्यास पीठ से ही सरकार से गौमाता को अति शीघ्र राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग किया।

उन्होंने कहा कि गौशाला में गौमूत्र, गौमय, गोबर आदि से अधिक से अधिक उपयोगी वस्तुएँ बनानी चाहिए।

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