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भगवान का जन्म लोकमंगल और धर्म का शंखनाद-आचार्य देवव्रत जी

भगवान का जन्म लोकमंगल और धर्म का शंखनाद-आचार्य देवव्रत जी

ढ़िगवस गांव में श्रीमद्भागवत कथा में भगवान का जन्मोत्सव देख मंत्रमुग्ध हुए श्रद्धालु

कथा सुनाते आचार्य देवव्रत जी
कथा में आरती पूजन करते श्रद्धालु

लालगंज, प्रतापगढ़। क्षेत्र के ढ़िगवस गांव में हो रही श्रीमद्भागवत कथा में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की कथा सुनकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो उठे। कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की झांकी देख महिला श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा की। कथाव्यास प्रयागराज धाम के आचार्य देवव्रत जी ने कहा कि धरती पर बढ़ते पाप को असहय देख भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया। उन्होने कहा कि भगवान का जन्म लोकमंगल की रक्षा और पाप से धरती के बोझ को मिटाने के लिए हुआ। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की मनमोहक कथा समझाते हुए आचार्य देवव्रत जी ने बताया कि भगवान को भक्त जिस रूप में जपा करता है भगवान भी उसी रूप में उसे उसी भाव से प्रतिफल दिया करते हैं। उन्होने कहा कि कर्म की सुचिता ही भगवान द्वारिकाधीश की सच्ची आराधना है। कथा के दौरान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव को लेकर व्यासपीठ से भजन संकीर्तन में श्रद्धालुओं को भी आनंदित देखा गया। श्रद्धालुओं ने भगवान की पालकी के साथ व्यासपीठ का भी पूजन अर्चन किया। कथा के संयोजक समाजसेवी रामप्रताप पाण्डेय व निर्मला पाण्डेय ने श्रीद्वारिकाधीश की आरती उतारी। इस मौके पर आदर्श मिश्र, लल्ले तिवारी, रज्जन मिश्र, प्रभाशंकर शुक्ल, प्रधान राजीव दुबे, अमित शुक्ल, हरीश मिश्र, मुकेश सिंह, रामकुमार पाण्डेय, मोनू पाण्डेय, राकेश तिवारी, विकास पाण्डेय, अनिल महेश, विकास मिश्र, दिनेश सिंह आदि रहे। सह संयोजक शीतला प्रसाद पाण्डेय, देवप्रताप पाण्डेय तथा संतोष पाण्डेय ने श्रद्धालुओं को महाप्रसाद वितरित किया।

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