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स्वच्छता एंव शहर के सुंदरता पर करोड़ो की खर्च बेकार

संवाददाता अखिलेश विश्वकर्मा का रिपोर्ट  श्री बंशीधर नगर  गढ़वा से : नपं श्री बंशीधर शहर को स्वच्छ एवं सुंदर बनाने में पूरी तरह से नाकाम साबित हो रहा है। यहां स्वच्छता एवं शहर की सुंदरता पर प्रति वर्ष करोड़ों रुपये खर्च किये जा रहे हैं। लेकिन अब तक न तो शहर स्वच्छ हुआ और न सुंदर।श्री बंशीधर नगर शहर का नाम श्री बंशीधर जी के नाम पर है। यहां विश्वविख्यात श्री बंशीधर मंदिर स्थित है। मंदिर में दर्शन पूजन को लेकर बाहर से प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु आते जाते हैं। शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने के गंभीर होने के बजाय नपं प्रशासन इसे हल्के में लिया। लिहाजा स्वच्छता और सुंदरता की प्राथमिकता पीछे छूट गयी कमीशनखोरी पहली प्राथमिकता बन गयी। स्वच्छता और सुंदरता के नाम पर पानी की तरह पैसे बहाये गये लेकिन धरातल पर अपेक्षाकृत बदलाव नही आया।उदाहरण के तौर पर नपं की ओर से शहर को सुंदर बनाने एवं रात्रि में दुधिया लाईट से जगमग करने के लिये करोड़ों रुपये खर्च कर कई राउंड में सोलर लाईट, इलेक्ट्रिक लाईट, झालर एवं सोलरयुक्त हाईमास्ट लाईट लगाया गया था। लेकिन घटिया लाईट लगाये जाने एवं नियमित देखभाल नहीं होने से शहर को सुंदर एवं जगमग करने का उद्देश्य अधूरा रह गया। करोड़ों की लगी लाईटें लगने के साथ ही आंख मिचौनी करने लगीं।रात्रि में बिजली नहीं रहने पर शहर की हृदयस्थली बस स्टैंड, हेंहो मोड़, चेचरिया, श्री बंशीधर मंदिर परिसर में घुप्प अंधेरा हो जाता है। शहर की हृदयस्थली को भी अभी तक चकाचक नहीं किया गया है तो विभिन्न वार्डों की क्या हालत होगी इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।शहर के विभिन्न वार्डों में रात्रि में अंधेरा छा जा रहा है। अभी हाल के दिनों में नपं की ओर से लाखों रुपये की लागत से लगाये गये इलेक्ट्रिक हाईमास्ट लाईट का भी यही हाल है। रात्रि में हाईमास्ट का अधिकांश लाईट नहीं जलता है। उसे देखने वाला कोई नहीं है।

अलबत्ता नपं की ओर से एक बात खूब प्रचार किया जाता है कि ठेका कंपनी को पांच साल देखरेख करना है, लेकिन ऐसा होता नहीं है। ठेका कंपनियां पैसा ले देकर चपत हो जाती है।

इस संबंध में कार्यपालक पदाधिकारी अमरेन्द्र कुमार चौधरी ने बताया कि जल्द ही खराब लाइट को दुरूस्त करा लिया जाएगा

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