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सरकारी अध्यापक अवैध रूप से पा रहे हैं सरकारी रिलीविंग एवं सरकारी सुविधाऐं 

सरकारी अध्यापक अवैध रूप से पा रहे हैं सरकारी रिलीविंग एवं सरकारी सुविधाऐं

 

 

हाथरस (शिवानी जैन एडवोकेट की रिपोर्ट)

श्री मानिकचंद इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य द्वारा जन सूचना अधिनियम 2005 के अंतर्गत मांगी गई सूचनाओं के जवाब में लिखित में दिया है कि श्री धीरेंद्र प्रताप सिंह सरकारी अध्यापक का जिला संगठन आयुक्त स्काउट पद के लिए ना तो इंटर कॉलेज से कोई पत्राचार किया गया है। ना ही श्री धीरेंद्र प्रताप सिंह का अधिकार पत्र और नियुक्ति पत्र जिला संगठन आयुक्त पद पर इंटर कॉलेज में उपलब्ध है।

यानी कि श्री धीरेंद्र प्रताप सिंह इंटर कॉलेज एवं महाविद्यालय में जाकर अवैध रूप से शिविर आयोजित करते हैं एवं मानदेय वह अन्य खर्चा भी प्राप्त करते हैं। सरकारी रिलीविंग एवं सरकारी सुविधा पाते हैं। वह जिला संगठन आयुक्त स्काउट खुद को बताते हैं।

सरकारी इंटर कॉलेज के बच्चों को न पढ़ाकर इस समय में प्राइवेट एनजीओ भारत स्काउट और गाइड के शिविर अपने व्यक्तिगत लाभ के लिए एवं अपनी आय को बढ़ाने के लिए वह सरकारी राजस्व की हानि एवं बच्चों की पढ़ाई का नुकसान करते हैं।

जबकि मैं रविंद्र कुमार शर्मा भारत स्काउट और गाइड जिला हाथरस में जिला संगठन आयुक्त स्थाई पद पर नियुक्त था। एक षड्यंत्र रचकर सरकारी अध्यापक श्री धीरेंद्र प्रताप सिंह उपरोक्त पद पर नियुक्त कर दिया गया। श्री धीरेंद्र प्रताप सिंह ने आयकर विभाग में भारत स्काउट और गाइड से प्राप्त होने वाली आय को उसमें दर्शाया है या नहीं।

आयकर विभाग भी संज्ञान लेवें की श्री धीरेंद्र प्रताप सिंह जब से स्वयं को जिला संगठन आयुक्त स्काउट हाथरस लिख रहे हैं तब से अब तक उन्होंने कितनी सरकारी सुविधा लीं एवं इंटर कॉलेज एवं महाविद्यालयों से कितनी धनराशि प्राप्त की। भारत स्काउट और गाइड जिला हाथरस के बैंक खाते की जांच की मांग करते हुए कहा कि श्री धीरेंद्र प्रताप सिंह के कार्यकाल की भी जांच होनी चाहिए।

अब जिला मुख्याआयुक्त हाथरस ने मुझे जिला प्रशिक्षण आयुक्त लिखा है। जिला हाथरस में भारत स्काउट और गाइड के शिविर रूपेश कुमार गौतम एवं विकास कुमार गौतम कॉलेजों में किसके आदेश से करा रहे हैं। प्रशिक्षण युक्त होने के नाते मुझसे कोई भी अनुमति पत्र नहीं लिया गया। इसलिए यह शिविर अवैध होंगे। माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार सहित भारत स्काउट और गाइड के सभी उच्च अधिकारियों को, कॉलेजों को पत्र लिखकर जांच कर कार्रवाही सुनिश्चित करने की मांग की एवं कॉलेजों से अनुरोध किया कि इन दो व्यक्तियों ने आपके कॉलेज से किस मद में कितनी धनराशि प्राप्त की है।

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