अंबेडकर नगर 
। जहागीरगंज थाना क्षेत्र के कोटिया अशरफ गांव में बीते 30 अप्रैल को हुए मारपीट में एक पक्ष को गंभीर चोटें आई थी । गंभीर चोटें आई पक्ष में एक युवक को गंभीर चोट आने के कारण उसे जहागीरगंज सी एच सी से रेफर कर, जिला अस्पताल जिला अस्पताल से रेफर होने के उपरांत लखनऊ आजमगढ़ होते हुए बनारस पहुंचा है। युवक की हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है। इसके बाद भी जहागीरगंज थाना अध्यक्ष की लापरवाही आ रही सामने।जैसा कि विदित होगा 30 अप्रैल को मामूली कहासुनी में जहांगीरगंज थाना क्षेत्र के कोटिया अशरखपुर गांव में दबंगो के द्वारा उनकी दबंगई सामने आई। जिसमें एक पक्ष को बेरहमी से मारा पीटा गया। पीड़ित सुरेश यादव पुत्र रामहरख यादव ने स्थानीय थाना पर रविंद्र यादव पुत्र दुर्बली, अखिलेश पुत्र रवींद्र, मुलायम पुत्र रविंद्र, अंकुर पुत्र रविंद्र के ऊपर शिकायती पत्र दिया। जिस पर थाना अध्यक्ष के द्वारा मामूली धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया गया जबकि सुरेश यादव सहित उनके परिजनों को गंभीर हालत में जहांगीरगंज सीएचसी से रेफर किया गया था। इस बात को भी थाना अध्यक्ष के द्वारा नजरअंदाज किया गया। सचिन यादव पुत्र सुरेश यादव की हालत इतनी बिगड़ गई की उसे जिला चिकित्सालय के डॉक्टरों ने परिजनों से अन्यत्र ले जाने की सलाह दी। परिजनों ने सचिन को लखनऊ स्थित राम मनोहर लोहिया में भर्ती कराने का प्रयास किया लेकिन किसी कारण से वहां पर भर्ती नहीं हो सका।परिजनों के द्वारा एक नामी डॉक्टर द्वारा आजमगढ़ में इलाज किया गया। जहां से उसे वाराणसी के लिए रेफर कर दिया गया। जहां पर सचिन का इलाज अभी भी चल रहा है। इधर स्थिति की नाजुक देखते हुए थाना अध्यक्ष के द्वारा कुछ धाराओं में बढ़ोतरी की गई और 151 की मामूली धारा में 15 दिन के लिए दो व्यक्तियों को गिरफ्तार कर जेल भेजने की कार्रवाई की गई। इस विषय में कई बार थाना अध्यक्ष से पूछा गया कि चार लोगों के ऊपर मुकदमा पंजीकृत है तो किस आधार पर दो व्यक्तियों को गिरफ्तार कर आपने जेल भेजा है। इस पर थाना अध्यक्ष के द्वारा बताया गया कि दो व्यक्तियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दिया जा रहा है लेकिन थाना अध्यक्ष के द्वारा दी गई दबिश का कोई भी प्रभाव अब तक नहीं पड़ा है जबकि चर्चा है कि आरोपी रविंद्र और उनके लड़के अभी भी क्षेत्र में खुलेआम घूम टहल रहे हैं लेकिन थाना अध्यक्ष को उनकी गिरफ्तारी के लिए दबिश भी बेअसर साबित हो रही है।क्षेत्र में चर्चा है कि रविंद्र यादव एक सरकारी अध्यापक है। अपने धन और बल के वजह से अपने आप को गिरफ्तारी होने से बचा रहे हैं। पुलिस के द्वारा यदि उनको गिरफ्तार कर जेल भेजा जाता है तो कहीं ना कहीं उनकी नौकरी खतरे में आएगी इसीलिए धन बल का प्रयोग कर रहे हैं और बच रहे हैं और थानाध्यक्ष के द्वारा उनको बचाया जा रहा है।