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जिला झारसुगुड़ा 2013 में 20.9 प्रतिशत था घटकर 2024 में 14 प्रतिशत रह गया है वन क्षेत्र इससे पर्यावरण को नुकसान


झारसुगुड़ा जिला में पहले 35 फ़ीसदी तक का जंगल था पिछले 30 सालों में करीब 20 से अधिक बड़े उद्योग व खदानों के बसने से झारसुगुड़ा का विकास हुआ बड़े दुख की बात है जंगल भी उजड़ते जा रहे हैं अभी भी खदान उद्योग रेल लाइन के बिस्तर जैसी परी योजनाओं के नाम पर सैकड़ो एकड़ जंगल काटे जा रहे हैं अगर यही स्थिति रही तो पूरा झारसुगुड़ा जिले में जंगल पूरी तरह से खत्म हो जाएगी पर्यावरणबिदों ने जताई है अन्यथा वह दिन दूर नहीं जब गर्मी के दिनों में तापमान इतना अधिक बढ़ेगा कि झारसुगुड़ा जिला की तुलना आग के गले से की जाने लगेगी उद्योगों की स्थापना को लेकर कांटे जा रहे हैं जंगल आब दिखाई नहीं दे रहे हैं जंगली जानवर पहले हिरण हाथी बाघ भालू देखने को मिलता था पर अब नहीं प्रशासन को समझना चाहिए पर्यावरण नुकसान करके उद्योग नहीं लगना चाहिए इंसानियत के नाते बड़े बुजुर्ग बच्चों के लिए सोचिए ऐसा विकास क्या काम का है

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