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फर्जी साईन पर बैठी मैराथन जाँच अपूर्ण बिल पर अटकी।मिलर ने लगाये गंभीर आरोप

अंबेडकरनगर 26 अप्रैल: खाद्य एवं राशद विभाग में नवीनतम भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है, जिसमें क्षेत्रीय विपरण अधिकारी और क्षेत्रीय विपरण निरीक्षकों ने एक मिलर से उपयोगी बोरे के भुगतान के लिए 50 प्रतिशत कमीशन की मांग की है। यह अधिकारियों पर आरोपित भ्रष्टाचार के मामले में एक नया उच्चाधिकारी स्तर का मुद्दा है।

अमिता इंडस्ट्रीज के प्रोपराईटर द्वारा आरोप लगाया है कि “50 प्रतिशतकमीशन न देने पर अधिकारियों ने हमारा भुगतान रुकवा दिया तथा उपयोगी बोरे की भुगतान के लिए बनाये गये बिल और प्रमाण पत्र को निरस्त करने की मांग भी की गई।उनकाकहना है कि अगर बिल या साईन फर्जी होती तो आज मुझे ये अधिकारी जेल भेज दिये होते अब अगर हस्ताक्षर सही है तो इन लोगों द्वारा मेरा भुगतान क्यों रोका गया है,क्यों मुझे पिछले 5 महीनें से सिर्फ आफिसों का चक्कर लगवाया जा रहा है।,,

पूरा मामला ये है-

मामला अम्बेडकर नगर में उपयोगी बोरे के भुगतान पर चल रही मैराथन जांच से सम्बन्धित है जिसमें पहले जिले के एम.ओ./एम.आई. ने फर्जी साईन कर भुगतान के लिए बिल प्रस्तुत करने को बोला था जिस पर तत्काल प्रभाव से जाँच बैठी जाँच में इन्हीं अधिकारियों द्वारा बताया गया कि क्लरिकल मिस्टेक की वजह से अपूर्ण बिल की जगह फर्जी साईन लिख गया था। फिर जाँच आगे बढ़ती है तो बिल को रद्द करने की माँग की जाती है।

यह मामला और दिलचस्प इसलिए है कि अधिकारियों द्वारा जिस बिल को फर्जी बिल,अपूर्ण बिल बताया जा रहा है उसमें से कुछ भुगतान उनके द्वारा तथ्यों की पुष्टि करने के बाद ही एस.आर.ओ. द्वारा किया गया है। सवाल उठता है कि एसआरओ सही है या ये अधिकारी?

इस मामले में अधिक जांच की जानी चाहिए ताकि इस प्रकार के आरोपित भ्रष्टाचार के सच का पता लगाया जा सके। इस मामले में विभिन्न स्तरों पर संबंधित अधिकारियों की जांच होनी चाहिए, ताकि खाद्य रशद विभाग में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। इस मामले पर उच्च अधिकारियों को दखल देना चाहिए।इस तरह की घटनाओं को रोकने और भ्रष्टाचार को रोकने के लिए जाँच कर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि विश्वास और विश्वास की नीति को स्थायी किया जा सके।

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