कौशांबी को बौद्ध सर्किट से जोड़कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनपद के विकास का खाका खींचा था, लेकिन सीएम की यह घोषणा 5 साल में महज चुनावी स्टंट बनकर रह गई। बौद्ध सर्किट को तैयार करने के लिए 23 करोड़ रुपए भेजे गए, लेकिन धरातल पर इसका असर नहीं हुआ। लोकसभा चुनाव में बौद्ध सर्किट और पर्यटन का मुद्दा एक बार फिर सत्ताधारी दल के नेताओं की जुबान पर है। बौद्ध सर्किट के सहारे भाजपा अपनी चुनावी नैया को पार लगाने की कोशिश में जुटी है।
