अंबेडकर नगर ।
*मालीपुर थाना अंतर्गत उमरबान कांड!*
5 महीने से अधिक होने को है ….
धर्मेंद्र चौहान की हत्या है या मौत? कानून की कटीली झाड़ियों में फंसकर इस कहानी के हर पन्ने बिखर रहे हैं।
सीमा विवाद में उलझी हुई मालीपुर पुलिस….
*आईपीसी और सीआरपीसी की प्रबल जानकारी पर भले ही अपनी पीठ ठोक रही हो !*
किंतु शाहगंज कोतवाली की जनरल डायरी की यह रिपोर्ट ….
चीख चीखकर साजिश और सियासत की तरफ उंगली उठा रही है ।
जहां इंस्पेक्टर कोतवाली का संदर्भित यह बयान कि,
*एक अज्ञात व्यक्ति जिसके घर का नाम पता मालूम नहीं!*
उसे घायल और अचेत अवस्था में 108 एंबुलेंस के माध्यम से भर्ती कराया गया .
जिसको जिला अस्पताल रेफर किया जा रहा है l
इस दशा में धर्मेंद्र चौहान की पत्नी को हत्या आरोपित करने वाला शिकायत पत्र,
इस बात को अपने पक्ष में पता है कि *मृतक धर्मेंद्र को लावारिस हालत में शाहगंज अस्पताल के द्वारा*….
जिला चिकित्सालय रवाना किया गया।
फिर मृतक के ससुरालियों द्वारा कैसे कहा जा सकता है कि …
उन्होंने उसे अपनी निजी गाड़ी से ले जाकर शाहगंज अस्पताल के हवाले किया था ।
विरोधाभास से भरपूर बयान के जंगल में भटकता ….
संपूर्ण प्रकरण एक प्रबल जांच की आवश्यकता महसूस कर रहा है कि…
*धर्मेंद्र की मौत के रहस्य से पर्दा उठ सके कि वह मौत भी हत्या?*
मालीपुर थाना क्षेत्र निवासी धर्मेंद्र चौहान की मौत एक गुमनाम पहेली की तरह ,
तब तक भटकता रहेगा जब तक
थाना अध्यक्ष मालीपुर
*शिवांगी त्रिपाठी विपक्षी ताकतों से मेल-जोल बनाकर मामले को ठंडे बस्ते में डालने की कवायत करती रहेंगी*!
शाहगंज और थाना मालीपुर के बीच सीमा विवाद में फंसा हुआ मृतक का गरीब परिवार ….
पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का मोहताज मुंह ताक रहा है कि,
संपूर्ण प्रकरण हत्या है या मौत का पर्दाफाश होना जरूरी है।
