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श्री मंदिर परिसर में हुआ चैत्र शुक्ल पक्ष दशमी के दिन सुर्दशा व्रत कथा का आयोजन 

श्री मंदिर परिसर में हुआ चैत्र शुक्ल पक्ष दशमी के दिन सुर्दशा व्रत कथा का आयोजन

गुरुवार शुक्ल दशमी तिथि को होता है महाव्रत

गरियाबंद जिले के अंतर्गत धर्म नगरी ग्राम अमलीपदर में इस गुरुवार को चैत्र मास के शुक्ल पक्ष दशमी तिथि होने का कारण सुर्दशा व्रत का व्रत मनाया गया

उड़ीसा अंचल से लगे हुए गांव होने के कारण यह व्रत आसपास के क्षेत्र में उड़ीसा सहित मनाया जाता है यह व्रत महालक्ष्मी को प्रसन्न करने हेतु रखा जाता है इस व्रत की महिमा श्री लक्ष्मी महापुराण में उल्लेख किया गया है जब कभी भी शुक्ल पक्ष के गुरुवार को दशमी तिथि होता है तो यह सुर्दशा व्रत मनाया जाता है जिसमें व्रत डोर में 10 गांठ होती है जिसमें 10 प्रकार के देवी देवताओं का निवास होता है इस व्रत का पालन करने से घर में धन संपदा सुख समृद्धि ऐश्वर्य की प्राप्ति भगवती लक्ष्मी भक्तों को प्रदान करती है इसी प्रकार आज श्री मंदिर में आदिकाल से चली आ रही परंपरा अनुसार श्री मंदिर के प्रांगण में ग्राम के माताएं बहने यह व्रत करने हेतु उपस्थित हुई एवं सभी सामूहिक रूप से इस व्रत का पालन किया एवं राजा नल रानी दमयंती की कथा और राजा चोल की कथा का श्रवण किया गया और सभी एक साथ हुलहुली देते हुए श्री महालक्ष्मी की जयघोष करने लगे और अक्षत पुष्प आंवला बेलपत्र से श्री महालक्ष्मी का पुजन अर्चना किया गया उक्त कार्यक्रम को श्री जगन्नाथ मंदिर पुजारी पंडित श्रीयुत युवराज पांडेय जी ने सम्पन्न करवाया और श्री महाप्रभु और महालक्ष्मी से सभी के कल्याण सुख समृद्धि की कामना करते हुए जय जगन्नाथ बोल हरी बोल कालिया के जयघोष से सारा गांव गुंज उठा।

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