
काजल निषाद को लोकसभा प्रत्याशी बनाए जाने के पीछे भी सपा प्रमुख अखिलेश यादव का PDA फार्मूला साफ नजर आया। बीजेपी के गढ़ यानी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अपनी सीट पर टक्कर देने के लिए सपा की सीधी नजर निषाद वोट बैंक पर थी। क्योंकि, गोरखपुर समेत पूर्वांचल की कई सीटों पर निषाद वोटर्स ही निर्णायक की भूमिका में होते हैं। इसके अलावा काजल निषाद के मैदान में होने से मुस्लिम और यादव के फिक्स वोट के साथ ही अन्य पिछड़े वोट पर भी सपा का सीधी नजर थी। क्योंकि, इसी फार्मूले के तहत 2017 में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद यहां हुए उपचुनाव में सपा,कांग्रेस और बसपा के महागठबंधन प्रत्याशी प्रवीण निषाद के आगे भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। काजल निषाद 2012 और 2022 में विधानसभा चुनाव और फिर 2023 के निकाय चुनाव में हार की हैट्रिक लगाने के बाद चौथी बार फिर राजनीति में भाग्य आजमा रही हैं।
