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श्रद्धा आस्था व भक्ति का संगम है

अभी हाल ही में छिंदवाड़ा जिले से अलग होकर नया जिला बना पांढुर्ना में आज संत मिलन समारोह का आयोजन किया जा रहा है जानकारी के अनुसार श्रद्धा आस्था व भक्ति का संगम है संत श्री एकनाथ सृष्टि मेला।।। पांढुर्णा जिले में सौसर तहसील की ग्राम रमाकोना में फागुन पंचमी से अष्टमी तक लगने वाला संत श्री एकनाथ सृष्टि मेल धार्मिक परंपराओं का संगम है रविवार को कान्हा नदी में संत मिलन समारोह होगा,,,, मान्यता है कि इस दिन भगवान विट्ठल व ब्रह्मलीन संत एकनाथ महाराज एवं भक्तों का आध्यात्मिक मिलन होता है इस अवसर पर आसपास के गांव से इकट्ठा होने वाला महाप्रसाद बटेगा स्थानिक भाषा में इसे सिधौली गोपाल काला कहा जाता है यहां परंपरा 400 साल से चली आ रही है एक भक्ति बताते हैं कि एक ग्राम देवी के दही लाई का प्रसाद रमाकोना के विट्ठल मंदिर तक पहुंचाने के दौरान श्रद्धालुओं की टोली में हाथों में झाड़ू लेकर प्रसाद पहुंचने वाले मार्ग की सफाई करते चलते हैं श्री एकनाथ सृष्टि कान्हा नदी महोत्सव समिति के अध्यक्ष राम राव सिग्नेचर पूरे का कहना है की नदी के प्रति वर्ष 30000 से अधिक श्रद्धालु महाप्रसाद ग्रहण करते हैं घरों से इकट्ठा किए गए प्रसाद को कभी-कभी महसूस नहीं होती है
हाथ में धर्म ध्वज लेकर रमाकोना तथा आसपास के गांव में मधुकरी खट्टी की जाती है मेला की शुरुआत मधुकरी से होती है वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता भावऊराम चौधरी बताते हैं कि एकनाथ सृष्टि मेले के प्रेरणा संघ हीरामन व माताजी महाराज के गुरु कोड़ी कंकाल महाराज के आदेश पर सृष्टि मेले का संत व भक्तों के भजन के लिए यह परंपरा शुरू की गई थी
संत एकनाथ सृष्टि महोत्सव के तहत बड़ी की परंपरा वर्षो से चली आ रही है इस परंपरा परिपालन निरंतर कई वर्षों से किया जा रहा है कानन नदी के संगम तट पर संत एकत्रित होकर महोत्सव मनाते हैं तथा महाप्रसाद वितरण किया जाता है।।।।
वंदे भारत से रंजीत डेहरिया की रिपोर्ट

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